जनसभा के अंदाज में बूथ सम्मेलन

डॉ दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

भाजपा के संगठन में बूथ प्रबंधन की विशेष महत्व है। इस प्रकार की रचना सर्व प्रथम भाजपा ने ही की थी। इसे संगठन की मजबूत बुनियाद के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। पार्टी के कार्यक्रमों के जमीनी प्रचार में बूथ समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गोरखपुर और कानपुर में बूथ स्तर के सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भारी उपस्थिति रही। दोनों जगहों पर नड्डा ने इस दृश्य का उल्लेख किया।

उनका कहना था कि कार्यकर्ताओं का यह सम्मेलन किसी जनसभा से कम नहीं है। इससे परिलक्षित है कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है। यही एक मात्र पार्टी है जिसमें साधारण कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे पदों पर पहुंच सकता है। भारत की अन्य पार्टियां परिवार आधारित है। इनमें मात्र एक परिवार का ही वर्चस्व रहता है। बूथ कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।

भाजपा को औरों से अलग है। यह भाव पार्टी कार्यकर्ताओं के आचरण से भी दिखाई देना चाहिए। पार्टी की इस विशेषता की लोगो को अनुभूति भी होनी चाहिए। यह जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं की है। इसके साथ ही उन्हें केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों से भी लोगों को अवगत कराना है। यह सुनिश्चित करना है कि कल्याण करी योजनाओं का लाभ लोगों तक आसानी से पहुंचता रहे। इस कार्य में कार्यकर्ताओं को सहयोग करना चाहिए। विपक्ष की नकारात्मक राजनीति से भी जनता को अवगत कराना आवश्यक है।

भाजपा महात्मा गांधी और सरदार पटेल आदि महापुरूषों से प्रेरणा लेती है। भाजपा में आंतरिक प्रजातंत्र है। जबकि दूसरे दलों में परिवारतंत्र। भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद लेकर चलती है। विपक्ष वंशवाद पर विश्वास रखता है। यह पार्टी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की भावना से कार्य करती है। इसकी नीतियों में अंत्योदय का विचार समाहित है। नड्डा ने कहा कि मोदी-योगी की डबल इंजन सरकार ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विकास के अभूतपूर्व कार्य हुए है।

कोरोना कालखंड में विपक्ष भाजपा के सदस्य लोगों की सेवा में लगे रहे। भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में लगे रहे। कोरोना काल में जनता की सेवा करने वाला दुनिया में कोई और दल नहीं था। नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के नौ माह के भीतर ही देश को दो स्वदेशी वैक्सीन उपलब्ध कराए। पहले भारत टीका मांगने वाला देश था।

आज यह टीका देने वाला देश बन गया है। देश मे एक सौ सोलह करोड़ लोगों को टीका लग चुका है। इसमें सर्वाधिक करीब पंद्रह करोड़ की संख्या उत्तर प्रदेश के लोगों की है।

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