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गांधी चिंतन के अनुरूप नव प्रवर्तन

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

भारतीय चिंतन में मानव मात्र के कल्याण की कामना की गई। महात्मा गांधी ने भारत की स्वतन्त्रता को भी इसी भाव में देखा। उन्होंने इस विचार को अपने जीवन व्यवहार में चरितार्थ किया। महात्मा गांधी ने साधन की पवित्रता का मार्ग दिखाया। वह भारत की स्वतंत्रता में दुनिया का स्वातंत्र्य लाभ देखते थे। उनका आंदोलन इसी विचार के अनुरूप था। वह स्वतन्त्रता के ऊपर सत्य को वरियता देते थे। इस मार्ग से वह कभी विचलित नहीं हुए।

महात्मा गांधी केवल देश को स्वतंत्र कराने के प्रति ही समर्पित नहीं थे,बल्कि उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाली अर्थव्यवस्था का भी विचार दिया था। इसी के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू किया है। वर्तमान  समय में भी महात्मा गांधी के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। प्रत्येक नागरिक गांधी के विचारों और दर्शन से लाभ उठाकर देश को आत्मनिर्भर बना सकता है। पूरी दुनिया गांधीवादी दर्शन के महत्व और सत्य,प्रेम,विनम्रता और अहिंसा के उनके सिद्धांतों को महसूस कर रही है,खासकर जब यह कठिन समय से गुजर रहा है। गांधी की प्रासंगिकता सर्वविदित है।

जीवन का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां गांधी के विचार प्रासंगिक नहीं लगते हैं। गांधीजी के विचार सच्चाई,शांति, अहिंसा,सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण,मूल्य आधारित शिक्षा आदि जैसे कई पहलुओं पर मार्गदर्शन करते हैं। छात्रों के पास आज गांधीजी के जीवन से बहुत कुछ सीखने का अवसर है कि छात्र राष्ट्र निर्माण में कैसे योगदान दे सकते हैं। आज देश का प्रत्येक नागरिक गांधी के विचारों और दर्शन से लाभ उठाकर देश को आत्मनिर्भर बना सकता है। कोरोना आपदा ने दुनिया के परिदृश्य को परिवर्तित किया है। जिसने विकास की आधुनिक मान्यताओं के सामने प्रश्नचिन्ह लगाया है। विकसित देशों को भी इस संकट में विवश देखा जा रहा है।

भारतीय संस्कृति की मान्यताओं का महत्व बढा है। इसके जीवन मूल्यों व जीवन शैली को स्वीकार किया जा रहा है। इस संकट में भारत ने सही समय पर सही तरीके से कदम उठाए है। कोरोना आपदा का व्यापक प्रभाव रहा है। भारत विश्व को उचित दिशा दिखा सकता है। लेकिन इसके पहले भारत को स्वयं आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिये इच्छाशक्ति, समावेशी विचार,निवेश, अवसंरचना और नवप्रवर्तन की आवश्यकता है। गांधी जयंती पर  लखनऊ में प्रतिभाशाली छात्रों को छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा  ने संबोधित किया। योगी ने कहा कि गुलामी की जंजीरों को तोड़कर बापू के नेतृत्व में देश को आजादी मिली।

आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ बावनवीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया जा रहा है। पूरी दुनिया के लिए बापू का संघर्षपूर्ण व्यक्तित्व कौतूहल का विषय था। दुनिया अचरज में थी कि कैसे एक धोती धारण करने वाला व्यक्ति भारत को स्वतंत्र कराएगा।

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