अमृत महोत्सव पर राष्ट्रीय एकता सन्देश

भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रववाद की अवधारणा अत्यन्त व्यापक है। इसमें सभी  उपासना पद्धतियों का समान रूप से महत्व व सम्मान रहा है। स्वतन्त्रता के बाद बल्लभ भाई पटेल ने राष्ट्रीय एकता कायम की थी। उनकी जयंती एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण तक में सरदार वल्लभ भाई पटेल का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उनका जीवन,व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव प्रेरणा के रूप में देश के सामने रहेगा। उन्होने युवावस्था में ही राष्ट्र और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया था। इस ध्येय पथ पर वह निःस्वार्थ भाव से लगे रहे। गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म को योग रूप में समझाया है। अर्थात अपनी पूरी कुशलता और क्षमता के साथ दायित्व का निर्वाह करना चाहिए।

सरदार पटेल ने आजीवन इसी आदर्श पर अमल किया। सरदार वल्लभ भाई पटेल जब वह वकील के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे, तब उसमें भी उन्होंने मिसाल कायम की। एक बार वह जज के सामने जिरह कर रहे थे, तब उन्हें एक टेलीग्राम मिला। उन्होने उसे देखा और चुपचाप जेब में रख लिया। जिरह जारी रही। जिरह पूरी होने के बाद उन्होंने घर जाने का फैसला लिया। उस तार में उनकी धर्मपत्नी के निधन की सूचना थी।

वस्तुतः यह उनके लौहपुरुष होने का भी उदाहरण है। दृढ़ता उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी। जिसका प्रभाव उनके प्रत्येक कार्य में दिखाई देता था। बचपन मे फोड़े को गर्म सलाख से ठीक करने का प्रसंग भी ऐसा ही था। तब बालक वल्लभ भाई अविचलित बने रहे थे। यह प्रसंग उनके जीवन को समझने में सहायक है। आगे चलकर इसी विशेषता ने उन्हें महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और कुशल प्रशासक के रूप में प्रतिष्ठित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर विधान भवन के सामने आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को राष्ट्र की एकता,अखण्डता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलायी।

इस अवसर पर उन्होंने ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ पर आयाोजित परेड का झण्डी दिखाकर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में देश स्वतंत्र भारत की एकता और अखण्डता के शिल्पी सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मरण कर रहा है। भारत ने स्वतंत्रता को बनाये रखते हुए एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा करते विगत पचहत्तर वर्षाें के दौरान जो उपलब्धियां हासिल की हैं, यह वर्ष उन पचहत्तर वर्षों के कार्यों का अवलोकन का अवसर होगा। आगामी पच्चीस वर्षों में हम सभी को भारत को दुनिया में कहां और किस स्थिति में लेकर जाना है, उसके लक्ष्य तय करने और संकल्प लेने का अवसर भी है।

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