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ग्रामीणों के कल्याण के लिए स्वामित्व योजना की सौगात

डॉ दिलीप अग्निहोत्रीग्रामीणों के कल्याण संबन्धी दशकों से उपेक्षित रहे सपनों को वर्तमान केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार साकार कर रही है। इसमें स्वामित्व योजना शामिल है। उत्तर प्रदेश में इसे घरौनी नाम दिया गया। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की थी।

क्योंकि उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक तीव्र गति से घरौनी का क्रियान्वयन किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ ने इसके अंतर्गत दस्तावेजों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और गरीब कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

घरौनी के लाभ

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक पीढ़ियों से अपना मकान बनाकर रहने वाले गरीब व किसान अब तक उस भूमि के मालिकाना हक से वंचित थे,किन्तु ‘स्वामित्व योजना’ के द्वारा उन्हें यह अधिकार अब प्राप्त होगा।

यह योजना गरीबों और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में अभिनव पहल है। स्वामित्व योजना’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अपने मकान की भूमि पर मिले मालिकाना हक से अब बैंक आदि से सहजतापूर्वक ऋण प्राप्त कर अनेक वित्तीय सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा। यह योजना भूमि संबंधी अनेक विवादों के निपटारे में भी सहायक सिद्ध होगी।

प्रत्येक ग्रामीण को घरौनी

योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर शुक्रवार को प्रदेश के 11 जनपदों के 1001 ग्रामों में 1,57,244 ग्रामीणों को ऑनलाइन से आवासीय अभिलेख घरौन प्रदान की। उन्होंने कहा कि अब हर व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा पाएगा। इसके तकनीक के महत्व को समझना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों को इस योजना का लाभ उपलब्ध हो रहा है। यह नई क्रांति है जो गरीबों और किसानों का हक देने के लिए भारत सरकार के स्तर पर किए गए प्रयासों का परिणाम है।

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अधिकार व आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि घरौनी मात्र भूमि का मालिकाना हक दिलाने वाला सरकारी कागज नहीं,बल्कि यह गांव के लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने,आत्मसम्मान का बोध कराने और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने का माध्यम है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को अपने ग्राम के आबादी क्षेत्र में अपनी सम्पतियों भवन प्लाट आदि के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। यह विवाद और भ्रष्टाचार को खत्म करेंगे ही, जरूरत पडऩे पर बेझिझक इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक से सहजतापूर्वक ऋण भी लिया जा सकेगा।

इस ऋण के जरिए ग्रामीण अपना कोई उद्यम भी लगा सकते हैं। इस तरह यह स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने का भी जरिया बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तैनी जमीनों पर लोगों के मकान तो थे,लेकिन उसका मालिकाना हक नहीं था। इससे लोगों को उत्पीडऩ और विवाद झेलना पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सरकार उनकी पुस्तैनी जमीन का मालिकाना हक दे रही है। ग्रामीण लाभार्थियों ने इस योजना को बहुप्रतीक्षित बताते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

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