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कुष्ठ के विरुद्ध साधना लड़ रहीं युद्ध, पहले खुद थी पीड़ित अब फैला रहीं जागरूकता

• छिपाने के बजाय सामना करने की दे रहीं सलाह

• असाध्य नहीं कुष्ठ, समय से इलाज करा कर पाएं मुक्ति

औरैया। जब पता चला कि मुझे कुष्ठ रोग है तो लगा कि अब जिंदगी खत्म हो गई लेकिन पति ने मनोबल बढ़ाया और पूरा साथ दिया। फिर सही समय पर नियमित इलाज और मार्गदर्शन के साथ जिंदगी ने फिर करवट ली। यह कहना है कुष्ठ रोग पीड़ित साधना का। साधना औरैया ब्लाक के पुरवा राहत गांव में रह कर यहां लोगों को कुष्ठ के प्रति जागरूक कर रहीं हैं। उन्होने #कुष्ठरोग को मात देकर अब इसके खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।

गृहणी साधना ने बताया कि कुछ वर्षों पहले मेरे पति राधेश्याम के शरीर में लाल चकत्ते पड़ गए थे। उन्होंने मामूली खुजली समझ कर उसे नज़रअंदाज किया। फिर स्वास्थ्य विभाग के कुष्ठ अभियान में स्क्रीनिंग के दौरान कुष्ठ रोग का पता चला। यह सुनते ही मेरे पति के होश उड़ गए। स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञों की राय और नियमित इलाज से एक ही साल में उन्होंने कुष्ठ को मात दे दी। अब वह स्वस्थ हैं। इसी बीच एक दिन मुझमें भी कुष्ठ के लक्षण दिखे। मन में नकारात्मक विचार आने लगे। फिर पति ने मेरा मनोबल बढ़ाया और इलाज के लिए प्रेरित किया। फिर मैंने भी कुष्ठ को मात दे दी। तभी मैंने सोचा की जैसे इस रोग का पता चलने के बाद मेरा मनोबल टूटा था वैसे ही और लोग का भी टूटता होगा। यही सोचकर अब मैं घर के काम निपटा कर ग्रामीणों को चौपाल व खुली बैठक में इस रोग के लक्षण व इलाज के लिए प्रेरित कर रहीं हूं। साधना ने बताया की वह सभी को समझाती हैं कि कुष्ठ लाइलाज बीमारी नहीं हैं। समय पर सही उपचार से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। इसको छिपाएं नहीं बल्कि डट कर सामने करें।

साधना ने बताया की जो भी ऐसे व्यक्ति उन्हें मिलते हैं जिनमें कुष्ठ जैसे लक्षण प्रतीत होते हैं मैं उन्हें कुष्ठ विभाग लेकर जाती हूँ जिससे सही पहचान हो सके और पूर्ण मुफ्त इलाज भी। जिला कुष्ठ सलाहकार डॉ विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि साधना अपने गाँव के साथ साथ आसपास के गांवों में भी कुष्ठ अभियान में स्वास्थ्य विभाग का भी सहयोग कर रहीं हैं। बताया की साधना द्वारा अब तक पाँच कुष्ठ रोगियों का इलाज कराया गया है।

क्या है कुष्ठ रोग

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ शिशिर पुरी बताते हैं कि अन्य रोगों की तरह कुष्ठ रोग भी एक प्रकार के सुक्ष्म जीवाणु से होता है। इसके रोगी की त्वचा पर हल्के पीले, लाल अथवा तांबे के रंग के धब्बे हो जाते हैं। इसके साथ ही उस स्थान पर सुन्नपन होना, बाल का न होना, हाथ-पैर में झनझनाहट आदि कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं।

यह है कुष्ठ रोगियों की श्रेणी

जिला कुष्ठ सलाहकार ने बताया कि पोसी बेसलरी श्रेणी में ऐसे रोगी आते हैं जिनके शरीर में 1 से 5 तक पैच (धब्बे) होते हैं। इसी तरह मल्टी बिसलरी श्रेणी में आने वाले रोगियों में 5 से ऊपर पैच या एक से ज्यादा नर्व इंवाल्ब हो। उन्होंने बताया कि मल्टी बेसलरी में तंत्रिका तंत्र डेमेज हो जाता है। ऐसे मरीजों को एमटीडी (मल्टी ड्रग थेरेपी दी जाती है।

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