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भारत ही नहीं विदेशों में भी स्थित हैं देवी के शक्तिपीठ

     दया शंकर चौधरी

शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 26 सितंबर से शुरू हो गए हैं। कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि नवरात्रि 26 सितंबर से लेकर 05 अक्टूबर तक है, तो कुछ 04 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन होने का दावा कर रहें। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल नवरात्रि का पर्व 26 सितंबर से लेकर 04 अक्टूबर तक ही मनाया जाएगा।

04 अक्टूबर को महानवमी के साथ ही नवरात्रि का समापन हो जाएगा। नवरात्रि में मां के 9 स्वरूपों की पूजा का विधान है। भक्त माँ की पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं। वहीं देवी मां के मंदिरों में जाकर उनके दर्शन भी करते हैं। नवरात्रि में माता के मंदिरों में बहुत भीड़ रहती है। माता के शक्तिपीठ धामों में भक्त दूर दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माता के 52 शक्तिपीठ हैं। यह शक्तिपीठ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्थित हैं। सभी शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। आप आसानी से इन शक्तिपीठ धाम के दर्शन करने जा सकते हैं।

ऐसी मान्यता है कि माता सती के वियोग में भगवान भोलेनाथ माता सती का शव लेकर तांडव कर रहे थे, तभी भगवान विष्णु ने उन्हें रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शव के टुकड़े कर दिए। माता सती के अंग और आभूषण जहां जहां गिरे, वह स्थान पवित्र शक्तिपीठ बन गए। अगर आप भारत के बाहर विदेशों में स्थित शक्तिपीठ धाम को देखना चाहते हैं तो यहां आपको विदेशों में बसे मां के शक्तिपीठ धाम के बारे में बताया जा रहा है।

तिब्बत: मनसा शक्तिपीठ

तिब्बत में मानसरोवर नदी के तट पर माता का पावन शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यहां माता सती की दाईं हथेली गिरी थी।

नेपाल:आद्या शक्तिपीठ- बांग्लादेश की तरह ही नेपाल में भी कई शक्तिपीठ हैं। नेपाल में गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां माता देवी की गंडकी स्वरूप की पूजा होती है।

गुहेश्वरी शक्तिपीठ- 52 शक्तिपीठों में से एक गुहेश्वरी शक्तिपीठ है, जो नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर बागमती नदी के किनारे स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यहां मां सती के दोनों ‘जानु’ यानी घुटने गिरे थे। यहां शक्ति के महामाया स्वरूप और भगवान शिव के भैरव कपाल स्वरूप की पूजा होती है।

दंतकाली शक्तिपीठ- नेपाल के बिजयापुर गांव में माता सती के दांत गिरे थे। इस कारण इस शक्तिपीठ को दन्तकाली शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

श्रीलंका: इन्द्राक्षी शक्तिपीठ

श्रीलंका के जाफना नल्लूर में देवी का शक्तिपीठ है। यहां माता सती की पायल गिरी थी। इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी कहा जाता है। मान्यता है कि देवराज इंद्र और भगवान श्रीराम ने माता के इस शक्तिपीठ की पूजा की थी।

बांग्लादेश:उग्रतारा शक्तिपीठ- बांग्लादेश में कुल पांच शक्तिपीठ हैं। बांग्लादेश में सुनंदा नदी के तट पर उग्रतारा शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की नाक गिरी थी। इस पीठ को सुगंधा शक्तिपीठ भी कहा जाता है। कहते हैं कि यहां माता सती देवी सुगंधा के रूप में शिव त्र्यम्बक के साथ वास करती हैं।

अपर्णा शक्तिपीठ– बांग्लादेश में दूसरा शक्तिपीठ भवानीपुर गांव में स्थित है। इस स्थान पर माता सती के बाएं पैर की पायल गिरी थी। यहां माता को ‘अर्पण’ और  भैरव जी को ‘वामन’ कहते हैं।

श्रीशैल महालक्ष्मी- बांग्लादेश के सिलहट जिले में शैल नाम के स्थान पर श्रीशैल शक्तिपीठ है। यहां पर माता सती का “गला” गिरा था।  इस शक्तिपीठ में महालक्ष्मी स्वरूप की पूजा होती है और भैरव बाबा शम्बरानंद के रूप में मौजूद हैं।

चट्टल भवानी– बांगलादेश में चिट्टागोंग जिले में सीता कुंड स्टेशन के पास चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल में माता का शक्तिपीठ है। यहां मां सती की दायीं भुजा गिरी थी। इस स्थान पर शक्ति के भवानी स्वरूप की पूजा होती है। यहां भी भैरवनाथ का मंदिर है, जिन्हें चंद्रशेखर कहते हैं।

यशोरेश्वरी माता शक्तिपीठ- बांग्लादेश के खुलना जिले में यशोर नाम की जगह है, जहां मां सती की बाईं हथेली गिरी थी। यहां माता के य़शोरेश्वरी स्वरूप की पूजा होती है।

जयंती शक्तिपीठ- बांग्लादेश के सिलहट जिले में ही जयंतिया परगना में खासी पर्वत पर जयंती माता मंदिर है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता की बाईं जांघ गिरी थी।

पाकिस्तान में बेहद मशहूर हैं ये 6 हिंदू मंदिर

बंटवारे से पहले पाकिस्तान में कई हिंदू मंदिर थे, लेकिन अधिकांश मंदिरों के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब कुछ ही मंदिर वहां देखने लायक बचे हैं। इन मंदिरों में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू रोज पूजा-अर्चना करने आते हैं, इन मंदिरों को तीर्थ स्थान के रूप में भी देखा जाता है। पाकिस्तान, भारत का पड़ोसी देश होने के अलावा एक खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस भी है। पाकिस्तान में आपको कई देखने लायक जगह मिल जाएंगी, जिनमें एक से बढ़कर एक भव्य हिंदू मंदिर भी शामिल हैं। बंटावारे से पहले पाकिस्तान में मुसलमानों और हिन्दुओं की मिली-जुली आबादी थी। जिनकी वजह से वहां हिंदू मंदिरों का निर्माण किया गया था। लेकिन समय के साथ-साथ उन मंदिरों का अस्तित्व मिटा दिया गया और अब यहां कुछ ही मंदिर शेष रह गए हैं। ये मंदिर बहुत ही लोकप्रिय और देखने लायक हैं, जिसकी वजह से पर्यटक खास तौर से इन मंदिरों के भी दर्शन करने जरूर आते हैं। आइये आपको ले चलते हैं पाकिस्तान के उन मंदिरों में, जहाँ कभी पूरे भक्तिभाव से भगवान की पूजा-अर्चना की जाती थी।

हिंगलाज माता मंदिर- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगोल नदी और हिंगोल नेशनल पार्क है, जिनके बीच में हिंगलाज माता का मंदिर मौजूद है। ये मंदिर बहुत प्रसिद्ध और दर्शनीय है। हिंगलाज मंदिर माता सती के कई प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। जब देवी सती हवन कुंड की अग्नि में समा गई थीं तब भगवान शिव ने उनके जलते शरीर को उठाकर तांडव करना शुरू कर दिया था। ऐसा माना जाता है कि उसी दौरान माता सती का सिर इस जगह गिर गया था। इसी वजह से इस मंदिर को यहां स्थापित किया गया। इस मंदिर में भगवान शिव भीमलोचन भैरव स्वरूप में विराजमान हैं और माता सती की भी यहां मूर्ती रखी गई है। ये मंदिर गुफा के आकार में पहाड़ियों के बीच बनाया गया है।

कटासराज शिव मंदिर- पाकिस्तान के कई प्रमुख हिंदू मंदिरों में से एक है कटासराज का शिव मंदिर। ये मंदिर पौराणिक कथाओं की वजह से बहुत मशहूर है। अगर आपको इस मंदिर को देखने के लिए जाना है, तो ये मंदिर पाकिस्तान के पंजाब के कटासराज नामक गांव में मौजूद है। पहाड़ों पर बने इस मंदिर में रोज हिंदू धर्म के श्रद्धालु श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शिवजी और माता सती ने विवाह संस्कार के बाद कटासराज गांव में कुछ समय बिताया था। ऐसा माना जाता है कि शिवजी का ये मंदिर लगभग 900 साल पुराना है।

श्रीराम मंदिर- पाकिस्तान के कई प्रमुख मंदिरों में पाकिस्तान का श्रीराम मंदिर बेहद लोकप्रिय है। ये मंदिर सैयदपुर में मौजूद है। सैयदपुर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के करीब है। ये लोकप्रिय मंदिर राजा मानसिंह द्वारा वर्ष 1580 में स्थापित किया गया था। ये ऐतिहासिक मंदिर पाकिस्तान के हिन्दुओं के लिए श्रद्धा का प्रतीक है।

पंचमुखी हनुमान मंदिर- पाकिस्तान के कराची में हनुमान जी का बहुत ही पुराना पंचमुखी हनुमान मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए भक्तों का यहां जमावड़ा लगा रहता है। इस मंदिर में आप हनुमान जी की पांच मुख वाली सुंदर मूर्ति देख पाएंगे, जो यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करती है। अभी इस मंदिर की संरचना थोड़ी खराब है। आपको जानकर बेहद हैरानी होगी कि ये मंदिर 1500 साल पुराना है।

गोरखनाथ मंदिर- पाकिस्तान के पेशावर में स्थित गोरखनाथ मंदिर, पाकिस्तान के खूबसूरत हिंदू मंदिरों में से एक है। वर्ष 1947 से इस मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस मंदिर को साल 2011 में फिर से खोल दिया गया। हिंदू धर्म के लोग इस मंदिर में गोरखनाथ देवता के दर्शन करने के लिए प्रतिदिन आते हैं।

वरुण देव मंदिर- वरुण देव मंदिर पाकिस्तान के लोकप्रिय हिंदू मंदिरों में शुमार है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर को भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद बंद कर दिया गया था। लेकिन हिंदू काउंसिल की वजह से वर्ष 2007 में इस मंदिर को फिर से खोल दिया गया। ये शानदार मंदिर 1000 साल पुराना है, जो कि हिंदू धर्म की संस्कृति को दर्शाता है।

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