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कश्मीरी ब्राह्मणों के आत्मा की शांति व मुक्ति के लिए काशी में आयोजित विशेष अनुष्ठान

  • मृतक आत्मा की शांति के लिए पिचाश मोचन तीर्थ पर हुआ त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म

  • फिल्म अभिनेता अनुपम खेर हुए शामिल

  • सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के सयुंक्त तत्वावधान में अनुष्ठान

  • Published by- @MrAnshulGaurav
  • Wednesday, June 15, 2022

वाराणसी: कश्मीर में हुए नरसंहार में हिंदुओ की निर्मम हत्या हुई। 1990 से शुरू हुए इस नरसंहार में सैकड़ो हिंदुओ मारे गए। घटना के 3 दशक बाद मोक्ष की नगरी काशी में इन्ही मृत हिंदुओ के आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान हुआ।

काशी के पिचाश मोचन तीर्थ पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कश्मीर में मारे गए हिंदुओ की आत्मा के शांति की लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म का आयोजन हुआ। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर सहित देश के अलग अलग राज्यों से आए विद्वान और सन्त इस विशेष अनुष्ठान के साक्षी बने। इस अनुष्ठान में उन कश्मीरी ब्राह्मणों के परिजन भी शामिल हुए जिन्होंने अपनो की जान इस हादसे में गवाई थी।

सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के सयुंक्त तत्वावधान में इस विशेष अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। अनुष्ठान में संस्था के संस्थापक डॉ संतोष ओझा ने मुख्य जजमान रहे। काशी के विद्वान ब्राह्मणों के उपस्थिति में ये अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अनुष्ठान का आचार्यत्व पण्डित श्रीनाथ पाठक उर्फ रानी गुरु ने किया उनके साथ कन्हैया पाठक,सुरेश पाठक,मनोज पाठक, अमित पाठक,नारायण दत्त मिश्र,बालकृष्ण पांडेय,राकेश दुबे,कन्हैयालाल पंड्या,टंक प्रसाद भंडारी इस अनुष्ठान में शामिल रहे।

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि आज का दिन उन कश्मीरी हिंदुओ के लिए जिन्होंने कश्मीर में हुए नरसंहार में अपनी जान गवाई। पूरे 32 साल बाद उन अतृप्त आत्माओं के मोक्ष की कामना से ये अनुष्ठान हुआ है। फिल्म कश्मीर फाइल्स के शूटिंग के वक्त ही मैंने निर्णय लिया था कि उन आत्माओं की शांति के लिए काशी में अनुष्ठान करूंगा।

श्राद्धकर्ता डॉ सन्तोष ओझा ने बताया कि कश्मीर में हुए नरसंहार न जाने कितने ऐसे परिवार थे जिनका श्राद्ध तक नहीं हुआ। सनातन धर्म के मान्यताओं के मुताबिक ऐसी अकाल मृत्यु के उपरांत मृतक आत्मा की शान्ति और मुक्ति के लिए विशेष श्राद्ध अनिवार्य होता है। इसी के निमित शास्त्रोक्त विधि से पिचाश मोचन तीर्थ पर त्रिपिंडी श्राद्ध किया गया है। बताते चले कि पूरी दुनिया में काशी ही एक मात्र ऐसी स्थान है जहां ये अनुष्ठान किया जाता है और सनातन धर्म मे ऐसी मान्यता भी है कि पिचाश मोचन पर इस अनुष्ठान से ऐसी अतृप्त आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है।

1990 से शुरू हुआ था सिलसिला

बताते चले कि 1990 के दशक से कश्मीर में हिंदुओं खासकर कश्मीरी पंडितों के साथ नरसंहार की शुरुआत हुई थी।इस नरसंहार में साल दर साल सैकड़ो लोगो को मौत के घाट उतारा गया। इस बीच लाखों कश्मीरी पंडितों ने अपनी पूर्वजों के करोड़ो की समाप्ति छोड़ रिफ्यूजी कैम्पों में रहने को मजबूर हो गए।इन्ही अतृप्त आत्माओं की शांति के लिए सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना ने इस विशेष अनुष्ठान को किया है ताकि उन आत्माओं को मुक्ति मिल सके।

51 हजार अजन्मी बेटियों के का कर चुके है श्राद्ध

22 सालों से आगमन सामाजिक संस्था पेट में पल रही बेटियों को जन्म लेने के अधिकार की आवाज को सामाजिक आंदोलन की तरह चला रही है । पेट में मारी गयी बेटियों के मोक्ष के लिए पिछले आठ सालों से डॉ सन्तोष ओझा काशी में पित्र पक्ष के नवमी तिथि को श्राद्ध करते आ रहे है, अब तक इन बेटियों की संख्या हजारों में है।

 रिपोर्ट – संजय गुप्ता

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