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गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य मां पर निर्भर : वीरेंद्र कुमार

आंगनबाड़ी केन्द्रों में हुई गोदभराई, भेंट की पोषण डलिया

छह माह तक सिर्फ मां का दूध फिर माँ के दूध के साथ ऊपरी आहार का महत्व बताया

औरैया। गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य उसकी माता के खानपान व पोषण पर निर्भर करता है। इसी पोषण की महत्ता के प्रति जागरूकता के लिए कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए मंगलवार को जनपद के विकास खंड अछल्दा के ग्राम पंचायत औतों के आंगनबाड़ी केंद्र में गर्भवती की गोदभराई की रस्म अदा की गई। गर्भवती को चुनरी ओढ़ाकर और सिन्दूर अक्षत लगाकर मंगल गीत के साथ गोद भराई की गई। छह माह तक नवजात शिशु को सिर्फ स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया गया।

पोषण माह में इस दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। गर्भवती को उपहार के रूप में पोषण डलिया भेंट की गयी। पोषण डलिया में नींबू आयरन कैल्शियम हरी सब्जी मौसमी फल गुड़ चना दिया गया। किशोरी बालिकाओं ने पोषण रंगोली बनाई। पोषण रंगोली विभिन्न प्रकार के फल, सब्जियां और आहारों से बनाई गयी जिसके माध्यम से गर्भावस्था से ही पोषित चीजों को इस्तेमाल करके अपना ध्यान रखने के बारे में में बताया गया।

आगनवाड़ी कार्यकर्त्ता सुमन चतुर्वेदी ने पोषण मटका सहजन सहित स्थापित किया और सभी को बताया कि पोषण रंगोली में डेमो दिया गया है कि गर्भावस्था से ही हमे ऐसे ही पोषित चीजों को इस्तेमाल करके अपना ध्यान रखना है। जिससे आप स्वस्थ शिशु को जन्म देंगी। कार्यक्रम में आगनवाड़ी सुमन चतुर्वेदी सहायिका माधुरी के साथ अलका नेहा रजनी उमा दीपा प्रियांशी ने प्रतिभाग किया। आए हुए लाभार्थियों को चने की दाल से बने ढोकला और दलिया से बना हलवा खिलाया और बताया की पोषाहार से ऐसे स्वादिष्ट चीजे बनाकर हम बच्चों को खिलाए और खुद खाए।

आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने कहा कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला गाढ़ा दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधिक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। छह माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। तब स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की जरूरत होती है।

अछल्दा क्षेत्र की प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) उमाकांती यादव का कहना है की कि गर्भवती, किशोरियां व बच्चो में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खाना चाहिए। 10 से 19 साल की किशोरियों को भी प्रति सप्ताह आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए द्य छह माह से पांच साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक-एक मिलीलीटर आयरन सिरप देना चाहिए।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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