भागवत कथा में राजा बलि और वामन अवतार का प्रसंग सुनाया

रायबरेली।चंदापुर कोठी के निकट पांडेय नेत्र चिकित्सालय में भागवत कथा के चौथे दिन शास्त्रोपासक डॉ चंद्र भूषण ने कहा कि भागवत मात्र ग्रंथ नही है जो ज्ञान की वृद्धि करे अपितु यह जीवन व्यवहार है।समुद्र मंथन का प्रसंग सही मायनों में आत्मावलोकन और आत्मविश्लेषण है जो तन मन व को शुद्ध करके भगवान मय बनाता है।वायु का भी जीवन मे बड़ा प्रभाव है। शास्त्रो ने वायु के उनचास प्रकार कहे है।

बामन अवतार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह अवतार कुल बावन जौ के बराबर काठी थी लेकिन जब बलि के यज्ञ में सन्यासी बामन देव ने तीन डग बराबर भूमि मांग कर पृथ्वी आकाश को दो डग में नाप कर न सिर्फ बलि का अहंकार चूर किया बल्कि तीसरे डग में उनके मस्तिष्क पर पैर रखकर उद्धार भी किया।जब विप्पत्ति में बलि ने पूर्वजो को याद किया तो समाधान मिला।जब परिस्थिति बिगड़े तो पूर्वजो को याद करे।दान का यदि अहंकार हो जाये तो दान का महत्व घट जाता है।लक्ष्मी जी ने पहली बार रक्षा बंधन करके बलि राजा को भाई बनाया।मत्स्यावतार में नारायण ने पर्यावरण संरक्षण का महत्व प्रतिपादित किया है।आज जीवन मे पर्यावरण का विशेष महत्व है।

भागवत की अनंत कथा कहते हुए आचार्य ने राम के जन्म की चर्चा की और कृष्ण जन्म की झांकी दिखाई।पंडाल में कौतूहल बरस पड़ा जब एक कर बालक ने कृष्ण रूप में प्रवेश किया। कथा के अंत मे आज ही तुलसी विवाह का आयोजन भी किया गया। शालिग्राम जी की बारात लेकर बृजेन्द्र बाजपेई आये और यजमान द्वय डॉ पीके पांडेय इंदु पांडेय ने स्वागत करके वधू पक्ष तुलसी जी का प्रतिनिधित्व किया ।इस मनोरम झांकी के वशीभूत कथा श्रोता भाव विभोर होते रहे।

आज की कथा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश बहादुर सिंह,डॉ आर एस मालवीय,उमा नाथ त्रिवेदी,महेंद्र अग्रवाल,स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी,सुनील ओझा के साथ सैकड़ो लोगो ने भागवत का आनंद प्राप्त किया।

रिपोर्ट-दुर्गेश मिश्र

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