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इस बार 16 जनवरी को ‘एकीकृत निक्षय दिवस’

• क्षयरोग के साथ फाइलेरिया, कुष्ठ और कालाजार रोगियों की भी होगी खोज व जाँच

• आशा कार्यकर्ता के माध्यम से उपकेंद्र तक लाए जाएंगे मरीज

• संभावित मरीजों को चिन्हित कर प्रदान की जाएंगी स्वास्थ्य सुविधाएं

कानपुर। देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से प्रत्येक माह की 15 तारीख को होने वाला निक्षय दिवस इस बार 16 जनवरी को मनाया जाएगा। इस बार टीबी के साथ-साथ फाइलेरिया, कुष्ठ और कालाजार के संभावित मरीजों को भी खोजा जाएगा। लक्षण वाले मरीजों को आशा कार्यकर्ता के माध्यम से उपकेंद्र तक पहुंचाया जाएगा ताकि इनका उपचार शुरू हो सके।

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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एपी मिश्रा ने बताया कि इस माह का निक्षय दिवस 15 जनवरी को रविवार होने की वजह से स्वास्थ्य केंद्रों में सोमवार (16 जनवरी) को ‘एकीकृत निक्षय दिवस’ मनाया जाएगा। इस दिवस का उद्देश्य टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान, गुणवत्तापूर्ण इलाज और योजनाओं का लाभ दिलाना है। उन्होंने बताया की शासन के निर्देश पर जनपद के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व जिला चिकित्सालय में एकीकृत निक्षय दिवस पर निक्षय गतिविधियों के साथ कुष्ठ, फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन गतिविधियों पर ज़ोर दिया जाएगा।

जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना ने बताया कि आशा कार्यकर्ता संभावित टीबी, कुष्ठ, फाइलेरिया व कालाजार के संभावित मरीजों की सूची तैयार कर उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक लाएंगी । सेंटर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) मरीजों की प्रारम्भिक जांच एचआईवी, डायबिटीज और अन्य जांच करेंगे। इसके साथ ही बलगम का नमूना लेंगे। उसे निक्षय पोर्टल पर आईडी बनाते हुए नजदीकी टीबी जांच केंद्र पर भेजा जाएगा. सीएचओ और आशा के जरिए निक्षय दिवस पर मिलने वाली सुविधाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। हाइड्रोसील एवं संभावित कालाजार और कुष्ठ के रोगियों की सूची बनाकर उपचार के लिए सीएचसी रेफर करेंगे।

जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि 16 जनवरी को होने वाले निक्षय दिवस में फाइलेरिया, कुष्ठ और कालाजार के मरीजों को भी चिन्हित करेंगे। फाइलेरिया और कुष्ठ के लक्षण वाले मरीजों को आशा कार्यकर्ता के माध्यम से स्वास्थ्य उपकेंद्र पर लाया जाएगा ताकि इनका सुचारू रूप से उपचार शुरू हो सके।

टीबी रोग के लक्षण

– दो सप्ताह या अधिक समय से खांसी होना।
– दो सप्ताह या अधिक समय से बुखार आना।
– वजन में कमी आना/ भूख न लगना।
– बलगम से खून आना।

कुष्ठ रोग के लक्षण

– शरीर पर सुन्न दाग।
– हथेली या पैर के तलवे में सुन्नता।
– हाथ-पैर, आंख में कमजोरी, विकृति।
– घाव जिसमें दर्द न हो।
– चेहरे, शरीर या कान पर गांठें, छाले, घाव।

फाइलेरिया के लक्षण

– पुरुषों के अंडकोष और महिलाओं के स्तन के आकार में परिवर्तन।
– सर्दी देकर तेज बुखार आना।
– हाथ-पैर में सूजन और तेज दर्द होना।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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