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हाफिज़े बुख़ारी की दरगाह पर उर्स के आखिरी दिन उमड़ती थी हजारों जायरीनों की भीड़, अनुमति न मिलने से नहीं हो सका उर्स का आयोजन

फफूंद/औरैया। हिंदुस्तान की सुप्रसिद्ध ख़ानक़ाह आस्ताना आलिया समदिया में हर साल होने वाले हाफिज़े बुख़ारी के सालाना उर्स के तीसरे व आखिरी दिन हज़ारों की संख्या में अकीदतमंद व मुरीद पहुंचकर उर्स के कर्यक्रमों में शिरकत करते थे। इस दौरान देर रात तक हज़ारों की संख्या में जायरीन दरग़ाह पहुंचते थे। जिससे ख़ानक़ाह के अलावा नगर की गलियों व बाजारों में भी खूब रौनक़ रहती थी। और गलियां भी गुलज़ार रहती थी लेकिन इस वर्ष कोरोना के चलते प्रशासन से ज्यादा लोगों की अनुमति न मिलने के कारण इस वर्ष होने वाले तीन दिवसीय उर्स के कार्यक्रम को खानकाह आस्ताना आलिया समदिया के सज्जादा नशीन ने रद्द कर दिया, जिसके चलते उर्स के आखिरी दिन दरगाह के अंदर सन्नाटा पसरा रहा।


नगर की ख़ानक़ाह आस्ताना आलिया समदिया में हर साल तीन दिवसीय उर्स हुज़ूर हाफिज़े बुख़ारी का आयोजन बड़ी धूम धाम के साथ होता था। जिसकी तैयारियां एक माह पूर्व से शुरू हो जाती थीं और उर्स के अंतिम दिन के कई कार्यक्रमों का सिलसिला सुबह से शुरू होकर तड़के चार बजे फ़जर की नमाज़ के बाद समाप्त होता था। सुबह उर्स के तीसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत फ़जर की नमाज़ के बाद क़ुरान ख़्वानी, और सुबह साढ़े आठ बजे महफ़िले मसाइले शरिया, इसके बाद महफिले शमा और हुज़ूर ख्वाजा बन्दा नवाज़ सैयद मिस्बाहुल हसन चिश्ती की सन्दल शरीफ की महफ़िल व हुज़ूर अकबर मियां चिश्ती के क़ुल की फातिहा होती थी। असर की नमाज़ के बाद हुज़ूर ख़्वाजा मिसबाहुल हसन चिश्ती के कुल शरीफ़ की महफ़िल इसके बाद तड़के सुबह चार बजे हुज़ूर हफ़िज़े बुख़ारी ख़्वाजा बेकस नवाज़ सैयद अब्दुस्समद चिश्ती के क़ुल शरीफ की महफ़िल व फ़ातिहा के साथ तीन दिवसीय उर्स हाफिज़े बुख़ारी का समापन हुआ करता था।

तीन दिनों तक मन्नतों मुरादों का दौर चलता रहता था।जिससे कारण नगर की गलियां गुलजार रहती थी व बाजारों में भी खूब रौनक रहती थी। इस वर्ष कोरोना के चलते प्रशासन द्वारा कम लोगों की अनुमति मिलने से उर्स का आयोजन नही हो सका। उर्स में देश के कोने कोने से हजारों की संख्या में जायरीन व मुरीदीन आते थे इस वर्ष वह भी न आ सके कस्बे के अकीदतमंदो में भी मायूसी देखने को मिली सोमवार को असर की नमाज़ के बाद खनक़ाह के अंदर कुल की मुख्तसर फ़ातिहा हुई।

रिपोर्ट-देवांशु चौहान

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