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जैविक कृषि को राज्यपाल का प्रोत्साहन

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जैविक कृषि हेतु प्रोत्साहित करती है। उनका कहना है कि इसमें लागत कम आती है। किसानों की आय बढ़ती है। सरकार किसनों की आय दोगुनी करने का अभियान चला रही है। इसके दृष्टिगत भी जैविक कृषि उपयोगी साबित हो सकती है।

इसके अलावा जैविक कृषि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होते है। राज्यपाल मोटे अनाज के उपयोग की भी सलाह देती है। अब तो विकसित देश भी भारतीय जीवन शैली व खान पान को अपना रहे है। आनन्दी बेन पटेल किसानों को ड्रिप सिंचाई व मृदा परीक्षण के लिए भी प्रेरणा देती है। राज्यपाल की प्रेरणा से अनेक किसान जैविक कृषि को अपना रहे है।

आनन्दी बेन ने राजभवन में सुल्तानपुर के प्रगतिशील किसान जमील अहमद से भेंट की। उनके कृषि उत्पादों का अवलोकन किया। जमील अहमद ने राज्यपाल के समक्ष काले गेंहू का आटा, मल्टीग्रीन आटा,काला नमक चावल,मसाला बेसन तथा देसी गुड़ को प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने उत्पादो की विशेषताओं और उसके ऑर्गेनिक गुणों से भी अवगत कराया। आनन्दी बेन ने जमील अहमद को अच्छी व बेहतर खेती के लिए उत्साहवर्धन किया।

सामाजिक सहयोग पर बल

एक अन्य कार्यक्रम में आनंदीबेन पटेल ने राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित उत्तर प्रदेश बाल कल्याण परिषद की कार्यकारिणी समिति एवं वार्षिक आम सभा की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण परिषद बच्चों के कल्याण के लिए ही बना है और अभिभावकों के आश्रय से छूटे या किन्ही कारणों से घर से भागे बच्चों को यहाँ आश्रय मिलता है। सामाजिक सहयोग इन बच्चों के संरक्षण की समुचित व्यवस्थाओं का बहुत बड़ा आधार होता है।

उन्होेंने परिषद को निर्देश दिया कि वे अपनी आवश्यकताओं का प्रस्ताव बनाकर सहायता समूहों,सामाजिक सहायता हेतु दान देने वाले लोगों से सम्पर्क करके प्रस्ताव के आधार पर पूर्ति के लिए आग्रह करें। उन्होंने परिषद द्वारा लघु गृह उद्योग लगाकर आवासित महिलाओं के सहयोग से आर्थिक उपार्जन के प्रयासों की प्रगति की समीक्षा भी की।

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

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