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सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा : सही समय पर दस्त प्रबंधन है बेहद जरूरी – सीएमओ

  • घर-घर जाकर ओआरएस घोल बनाना ‌सिखा रहीं आशा कार्यकर्ता
  • डायरिया से बचाव के लिए दे रहीं हाथ साफ रखने की सलाह

कानपुर। दूषित पेयजल व् भोजन ,स्वच्छता का अभाव आदि दस्त रोग का मुख्य कारण हैं। दस्त रोग बाल्यावस्था में मृत्यु के प्रमुख कारणों में दूसरे स्थान पर है। इसका उपचार मौखिक निर्जलीकरण घोल (ओआरएस) एवं जिंक की गोली से किया जा सकता है एवं बाल मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। दस्त से शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। ओआरएस इस कमी को दूर करता है। यह कहना है मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ नैपाल सिंह का। वह बुधवार को सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के अंतर्गत मुख्य चिकित्साधिकारी सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।

सीएमओ का कहना है कि डायरिया से बचाव एवं प्रबंधन के संबंध में हरेक वर्ष की भांति इस साल भी बच्चों में डायरिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जनपद में 1 जून से सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू किया गया है। 15 जून तक चलने वाले इस पखवाड़े में आशा वर्कर घर-घर जाकर पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों की सूची तैयार कर रहीं हैं । उनका कहना है कि डायरिया (दस्त) होने का सबसे प्रमुख कारण सफाई का अभाव होना है। दरअसल यह एक संक्रमण है। संक्रमण से पाचन क्रिया खराब हो जाती है और मल पानी जैसा हो जाता है। पानी अधिक जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए डायरिया में लापरवाही नहीं होनी चाहिए, खासकर बच्चों के मामले में।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एके कन्नौजिया ने बताया गर्मी के मौसम में डायरिया ज्यादा खतरनाक रूप धारण कर लेता है। उसका कारण है कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि बच्चे को डायरिया होने की शिकायत पर तत्काल ओआरएस घोल देना शुरू कर दें। इस संबंध में जागरूकता के लिए जनपद में 15 जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है।

उप स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी राजेश यादव ने बताया की इसके लिये आशाएँ अपने अपने क्षेत्र में बच्चों को चिन्हित करने का कम कर रहीं है और गृह भ्रमण कर ओआरएस बनाने की विधि का प्रदर्शन भी करके बता रहीं हैं | उन्होंने बताया कि अभियान के तहत छह वर्ष तक के बच्चों वाले घरों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। डायरिया के कारण और बचाव पर जानकारी के दौरान आशा बताती हैं कि डायरिया से बचाव का मूल मंत्र हाथों की सफाई में छिपा है। दरअसल, बच्चे गंदे हाथों से कुछ खाते हैं संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। इसलिए उन्हें सिखाएं कि खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद हाथों को साबुन – पानी से अच्छी तरह से धोना जरूरी है।

इस दौरान समस्त अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ,मुख्य चिकत्सा अधीक्षक व जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के सदस्यों सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट – शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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