सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा : 15 जून तक बच्चों रखा जाएगा विशेष ख्याल

• स्वास्थ्य केन्द्रों पर बनाएं ओआरएस एवं ज़िंक कोर्नर्स

• आशा गृह भ्रमण कर सिखा रहीं ओआरएस बनाने की विधि

औरैया। बच्चों में डायरिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए बुधवार को जनपद में 1 जून बुधवार से सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू किया गया है। जिसके तहत गुरुवार को लगभग 2000 से अधिक ओआरएस घोल के पैकेट और जिंक की गोलियों का वितरण किया गया। 15 जून तक चलने वाले इस पखवाड़े में आशा वर्कर घर-घर जाकर पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों की सूची तैयार कर रहीं हैं । ऐसे बच्चे जो दस्त से पीडि़त हैं, उन्हें चिन्हित कर उपचार दिलाने में मदद कर रहीं है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि भीषण गर्मी और रोज चढ़ते हुये पारे के साथ-साथ गर्मियों में होने वाली बीमारियों ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। डायरिया ऐसी ही एक बीमारी है जो पूरे देश में नवजात व बाल मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है। इसको नियंत्रित करने के लिए जनपद सहित पूरे प्रदेश में 15 जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े अभियान का संचालन किया जा रहा है।

अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ शिशिर पुरी ने बताया कि इस पखवाड़े का उद्देश्य ओआरएस और जिंक के उपयोग के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना मुख्य है। यदि किसी भी बच्चे को दस्त हो तो उसे ओआरएस का घोल बनाकर उसे तत्काल तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए, साथ ही दस्त के दौरान जिंक गोली का उपयोग अवश्य किया जाए। उन्होने बताया कि दो माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कुल 14 दिनों तक खुराक देना चाहिए। जिसमें 2 से 6 माह तक के बच्चों को आधी गोली और 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे को एक गोली जिंक की देना चाहिए।

डॉ. पुरी ने बताया कि ओआरएस का घोल देने के साथ ही डायरिया से पीड़ित बच्चे को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर आवश्य ले जाएं। बीमारी के दौरान बच्चे को उसकी आयु के अनुसार स्तनपान एवं ऊपरी आहार तथा भोजन अवश्य दें। बाल्यावस्था में दस्त के दौरान बच्चे को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल ही दिया जाए, ध्यान रहे खाना बनाने से पूर्व व बच्चे का मल साफ करने के पश्चात महिलाओं को साबुन से अपना हाथ अवश्य धो लेना चाहिए। वहीं शौच के लिए शौचालय का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। यदि बच्चे को पानी जैसा लगातार मल हो बार बार उल्टी हो, अत्यधिक प्यास लगे, पानी न पी पाएं बुखार हो और मल में खून आ रहा हो तो उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाना चाहिए। इसका जनपद के सभी पीएचसी सीएचसी केंद्र पर निःशुल्क इलाज उपलब्ध है।

जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक अजय पाण्डेय ने बताया की इसके लिये आशाएँ अपने अपने क्षेत्र में बच्चों को चिन्हित करने का कम कर रहीं है और गृह भ्रमण कर ओआरएस बनाने की विधि का प्रदर्शन भी करके बता रहीं हैं. उन्होंने बताया कि आशा सामान्य डायरिया का इलाज करने के अलावा गंभीर केस को रेफर करेंगी जिससे पीएचसी व सीएचसी पर उनका सही उपचार हो सकें।

स्वास्थ्य केंद्र पर बनाएं ओआरएस एवं ज़िंक कोर्नर्स – माताओं के साथ काउन्सलिंग की भी इस पखवाड़े में अहम भूमिका होगी जिसमें उन्हें स्तनपान, सही तरीके से हाथ धोने, साफ़-सफाई रखने, शौञ्च के लिये शौंचालय का प्रयोग करने आदि के बारे में बताया जाएगा जिससे डायरिया से बचाव हो सके। सभी पीएचसी, सीएचसी, सब-सेन्टरों, जिला चिकित्सालय में ओआरएस एण्ड जिंक कॉर्नर्स बनाये जायेंगे, जहां ओआरएस और जिंक टेबलेट के माध्यम से सामान्य डायरिया का इलाज किया जाएगा।

रिपोर्ट -शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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