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टीबी चैंपियन हुए प्रशिक्षित, समुदाय को करेंगे जागरूक

पोस्टर, पंपलेट व अन्य प्रचार प्रसार सामग्री के जरिये क्षय उन्मूलन की जगाएंगे अलख

कानपुर नगर व फतेहपुर के 24 चैंपियन की समीक्षा के साथ आईईसी का हुआ अनावरण

कानपुर नगर। क्षय रोग यानि टीबी के प्रति जागरूकता लाने के साथ ही टीबी को लेकर व्याप्त भेदभाव और भ्रांतियों को दूर करने के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक पहल की है। इसके लिए टीबी चैम्पियन नियुक्त किए गए हैं। यह चैंपियन पोस्टर, पंपलेट, बैज और टैटू के जरिए लोगों को टीबी के लिए जागरूक ​करेंगे। बुधवार को जनपद के एक स्थानीय होटल में कानपुर नगर व फतेहपुर के टी.बी.चैम्पियन की दो दिवसीय समीक्षा बैठक हुई जिसमें कुल 24 टी.बी.चैम्पियन ने प्रतिभाग किया।

सभी टीबी चैंपियन टीबी मरीजों को उपचार और भावनात्मक सहयोग के साथ समुदाय को भी जागरूक करने का काम कर रहे हैं। टीबी मरीजों को संबल प्रदान कर उनकी हर तरह से मदद में जुटे टीबी चैंपियन प्रशिक्षण प्राप्तकर डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर (डीटीसी), टीबी यूनिट (टीयू) और प्रभावशाली लोगों के बीच इन आईईसी मैटेरियल के सहारे संवेदीकरण करेंगे । इसके लिए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एपी मिश्र की अध्यक्षता में कानपुर नगर व फतेहपुर जिले के 24 टीबी चैंपियन के समीक्षा कार्यक्रम के दौरान आईईसी मैटेरियल का अनावरण भी किया गया। आयोजन वर्ल्ड विजन इंडिया, एफआईएनडी और रीच संस्था द्वारा यूनाइट टू एक्ट प्रोजेक्ट के तहत किया गया।

टीबी मरीजों के घर पहुंच दिया भरोसा : जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जिले के टीबी चैंपियन टीबी मरीजों के घर पहुंच कर उन्हें संबल प्रदान कर रहे हैं । इन सभी लोगों को समीक्षा बैठक में बताया गया है कि टीबी मरीजों को प्रेरित करें कि वह बीच में दवा न बंद करें। दवा बंद करने से टीबी बिगड़ सकती है यानि एमडीआर का रूप ले लेती है और कई बार एक्सडीआर टीबी भी बन जाती है जिसमें जटिलताएं बढ़ जाती हैं। टीबी की दवा तब तक खानी है जब तक कि चिकित्सक द्वारा बंद करने की सलाह न दी जाए। इसी प्रकार टीबी के प्रत्येक निकटवर्ती व्यक्ति की (जो अत्यंत निकट रहा हो) टीबी जांच आवश्यक है और साथ ही उसे टीबी प्रिंवेटिव थेरेपी के तहत बचाव के लिए दवा खानी है। यह सभी संदेश समुदाय तक पहुंचाने के लिए टीबी चैंपियन से कहा गया है।

डीटीसी और टीयू पर पोस्टर लगाएंगे टीबी चैंपियन :डॉ. मिश्रा ने बताया कि टीबी चैंपियन डीटीसी और टीयू पर पोस्टर लगाएंगे जबकि समाज के प्रभावशाली लोगों के बीच पंपलेट व अन्य आईईसी सामग्री लेकर टीबी के लक्षणों के बारे में बताएंगे। लोगों को प्रेरित किया जाएगा कि टीबी के लक्षण वाले व्यक्तियों को सरकारी अस्पताल में निःशुल्क जांच व इलाज के लिए प्रेरित करें।

लक्षण दिखे तो कराएं जांच : जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना ने बताया कि अगर लगातार दो हफ्ते से खांसी आए, बलगम में खून आए, रात में बुखार के साथ पसीना आए, तेजी से वजन घट रहा हो, भूख न लगे तो नजदीकी डीएमसी या टीयू पर टीबी जांच निःशुल्क करवा सकते हैं। अगर जांच में टीबी की पुष्टि हो तो पूरी तरह ठीक होने तक इलाज चलाना है।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना, पी.पी.एम.सुधीर यादव, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर महेंद्र शर्मा एवं वर्ल्ड विजन इंडिया संस्था के कानपुर जिला समन्वयक राम राजीव सिंह व फ़तेहपुर जिला समन्वयक महादेव पवार प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

आईईसी मैटेरियल से देंगे ऐसे संदेश

  • टीबी एक संक्रामक रोग है जो बैक्टीरिया के कारण होता है और इसका पूरी तरह से इलाज संभव है।
  • बालों और नाखूनों को छोड़ कर टीबी शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है।
  • फेफड़ों की टीबी को पल्मोनरी,जबकि शरीर के अन्य अंगों की टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी कहते हैं।
  • केवल फेफड़े की टीबी ही संक्रामक है।
    जब टीबी ग्रसित व्यक्ति असुरक्षित तरीके से खांसता या बोलता है तो हवा के माध्यम से दूसरे को संक्रमण होता है

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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