गन्ने का समर्थन मूल्य: महंगा साबित होगा मात्र 25 रुपये की बढ़ोतरी

लखनऊ। रालोद के राष्ट्रीय सचिव अनिल दुबे ने प्रदेश की भाजपा सरकार को किसान और गरीब विरोधी बताते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य मात्र ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ाना भाजपा सरकार को काफी महंगा साबित होगा। प्रदेश के गन्ना किसानों को उम्मीद थी कि सरकार गन्ने का रेट अपने पूर्व घोषित वायदे के अनुसार लागत का डेढ़ गुणे के हिसाब से तय करेगी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में गन्ने की पैदावार पर ₹450 प्रति क्विंटल से कम का मूल्य देना, गन्ना किसानों के साथ सरासर अन्याय हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में गन्ने से प्रतिवर्ष 32000 करोड रुपए राजस्व सरकार को प्राप्त होता है, इसके बावजूद भी प्रदेश के गन्ना किसानों को सरकार ने उचित रेट ना देकर यह साबित किया है कि उनकी नीति और नियत चीनी मिल मालिकों के साथ हैं।

श्री दुबे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से गन्ने के रेट पर पुनर्विचार करते हुए लागत की डेढ़ गुना के हिसाब से गन्ने का मूल्य तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान मोदी सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक तरीके से बनाए गए कृषि कानूनों से पहले से ही परेशान हैं और उन कानूनों को वापस लेने के बजाय प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना किसानों की अनदेखी करते हुए मात्र ₹25 की वृद्धि करते हुए प्रदेश के गन्ना किसानों के साथ अन्याय किया। इसका जवाब किसान सरकार को 2022 के चुनाव मे देगा।

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