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सोते समय दीवार गिरी, पुत्र समेत दंपती की मौत, कच्ची दीवार पर छप्पर डालकर रह रहा था परिवार तीन अन्य पुत्र गंभीर

• कई बार लिखित शिकायत के बाद भी जांचे तो हुई पर आवास नही मिल सका

• प्रधान बोले इस बार लिस्ट में नाम था एक क़िस्त भी खाते में पहुँची

बिधूना। तहसील के थाना कुदरकोट व ब्लाक ऐरवाकटरा क्षेत्र के गांव गोपियापुर में एक परिवार कच्ची दीवार पर दोनों तरफ छप्पर डालकर रह रहा था। बीती रात्रि छप्पर के नीचे सोते समय अचानक कच्ची दीवार के गिर जाने से परिवार के सभी छह सदस्य उसके नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो गये। चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग घायलों को मलबे से निकालकर सीएचसी बिधूना ले आये। जहां पर डाक्टरों ने पति, पत्नी व एक बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जबकि गंभीर घायल दो बच्चों को रिम्स सैंफई के लिए रेफर कर दिया है। वहीं कम घायल बच्चे का इलाज कर उसके ताऊ के साथ घर भेजने की बात कही गयी है। डीएम व एसपी ने रात्रि मेें ही गांव में पहुंचकर घटना स्थल को देखा व वहां मौजूद लोगों से वार्ता की।

जानकारी के अनुसार थाना कुदरकोट व ब्लाक ऐरवाकटरा की ग्राम पंचायत बीबीपुर के मजरा गोपियापुर निवासी इंद्रवीर राठौर 45 पुत्र तुलसीराम राठौर गरीबी व सरकारी आवास मिलने के अभाव में एक कच्ची दीवार पर दोनों तरफ छप्पर रखकर पत्नी शकुन्तला 42, आकाश 15, विकास 12, अनुराग 10 व अंशू 6 के साथ रहकर जिंदगी का गुजारा कर रहा था और मेहनत मजदूरी कर परिवार को पेट पाल रहा था।

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उक्त परिवार गांव में बने पंचायत घर में खाना आदि बनाता खाता था। जिसके बाद अपने छप्पर वाले में मकान में आकर सोता था। जहां पर अपने जानवर आदि भी बांधता था। शुक्रवार की शाम खाना आदि खाकर उक्त परिवार छप्पर के नीचे सोया था। तभी रात्रि करीब 11ः15 बजे अचानक कच्ची दीवार गिर गयी। जिससे इंद्रवीर के परिवार के सभी छह सदस्य दीवार के मलबे के नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो गये।

दीवार के गिरने से उसके नीचे दबे परिवार के सदस्यों की चीख पुकार सुन पास में ही रह रहे इंद्रवीर के भाई कन्हैयालाल, राम प्रकाश, चन्द्र प्रकाश व धर्म प्रकाश एवं अन्य पड़ोसी दौडे। जिन्होंने आनन फानन मलबे में दबे परिवार के सदस्यों को निकालने के प्रयास के साथ घटना की जानकारी पुलिस को दी। कुछ देर में ही ग्रामीण मलबे में दबे गंभीर घायल इंद्रवीर, शकुन्तला, आकाश, विकास, अनुराग व अंशू को मलबे से बाहर निकाल पुलिस के सहयोग से रात्रि करीब 12ः30 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिधूना ले आये। जहां पर डाक्टरों ने इंद्रवीर, शकुन्तला व विकास को देखते ही मृत घोषित कर दिया। जबकि आकाश, अनुराग व अंशू की गंभीर हालत को देखते हुए रिम्स सैंफई के लिए रेफर कर दिया है।

कच्ची दीवार के गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत पर जहां गांव में मातम छाया हुआ है। वहीं मृतकों के परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। वहीं जिलाधिकारी पी.सी. श्रीवास्तव व पुलिस अधीक्षक चारू निगम ने रात्रि में ही गोपियापुर घटना स्थल पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी ली। जिसके बाद अस्पताल आकर परिजनों से वार्ता की। बताया गया कि दीवार गिरने से गरीब परिवार के जानवर भी दबकर घायल हो गये है।

डीएम व एसपी मौके पर पहुंचे

जिसके बाद डीएम व एसपी ने अस्पताल पहुंचकर मृतकों के परिजनों से वार्ता की साथ ही घायल बच्चे के बेहतर इलाज के लिए डाक्टरों को निर्देश दिया। डीएम ने बताया कि गोपियापुर गांव में एक मोटी कच्ची दीवार गिर गयी है। जिससे उसमें रह रहे इंद्रवीर उनकी पत्नी व एक बेटे की दुखद मौत हो गयी है। तीन बेटे घायल हैं। जिसमें एक कम घायल है। गंभीर दो बच्चों को रिम्स सैंफई के लिए रेफर किया गया है। बताया कि हम लोग गांव गये थे। घटना के तत्काल बाद थाना व तहसील की टीम ने मौके पर जाकर गांव वालों के सहयोग से रेस्क्यू आपरेशन कर सभी को हाॅस्पिटल लाया गया, पर इसमें तीन लोगों की दुखद मृत्यु हो गयी है। बताया कि हम इसमें देखेंगे कि इनके लिए क्या कर सकते हैं। जो भी सरकार की सहायता देय है वो तत्काल 1-2 दिन में उपलब्ध करायी जायेगी।

सरकारी आवास के बारे में बताया कि अभिलेख तो सुबह दिन में देखने को मिलेंगे, पर प्रधान से पूछा तो बताया कि इस वर्ष इनका चयन हो गया था और प्रथम किस्त इनके खाते में चली भी गयी थी। यह आवास बनाने वाले ही थे, पर उससे पहले यह दुखद घटना हो गयी। कहा कि यह आपदाएं है। यह लोग खाना बरात घर में बनाते थे और सोने के लिए लगाव के तहत अपने घर में आते थे। कच्ची मोटी दीवार थी, वह गिर गयी। जानवर भी वहीं पास में बंधे रहते हैं। कहा कि बच्चों के नाम बहुत जल्द पांच लाख रूपए स्वीकृत करेंगे। पीएम आवास मिल चुका है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए कुछ न कुछ तीनों को हमेशा मिलता रहे, जब तक ये बड़े हो जायें। उसके लिए मुख्यमंत्री की योजना है, जो कोविड काल में शुरू हुई थी। उसमें हर बच्चे को 4 हजार रूप्या महीना पढ़ने को मिलेगा। वाकी आप लोग सहारा है। सरकार तो एक दो दिन सहारा देकर चली जाती है। सरकार पर्मानेंट सहारा नहीं देती है।

ग्रामीणों का कहना है कि भूमिहीन गरीब परिवार प्रधान, सचिव व जिम्मेदार लोगों की अनदेखी व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। लोगों का कहना है कि इस परिवार को अगर सरकारी आवास मिला होता तो आज इतना बड़ा हादसा नहीं होता। आरोप है कि जिन लोगों के पास 20-20 बीघा जमीन है उन्हें तो सरकारी कालौनी दी गयी। लेकिन इस भूमिहीन व्यक्ति के पास रिश्वत देने के पैसे न होने के कारण न तो उसे सरकारी कालौनी मिली, न ही अन्य कोई सरकारी सुविधा मुहैया करायी गयी। जिससे वह मकान बनाकर अपने परिवार के साथ पक्की छत के नीचे अपने परिवार के साथ रह सकता। लोगों का आरोप है कि इस घटना के लिए वह सिस्टम भी जिम्मेदार है जिसकी वजह से उसे सरकारी कालौनी नहीं मिल सकी।

रिपोर्ट – संदीप राठौर चुनमुन

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