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गिले-शिकवे भुला कर प्रेम करना ही इबादत है…

• स्मृति सप्ताह के दौरान आयोजित ऑनलाइन मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा संपन्न।

• देश के 9 प्रदेशों से शामिल हुए 30 कवि एवं शायर, पढ़ी रचनाएं।

• काव्य गोष्ठी में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माताजी के निधन पर सप्रेम संस्थान द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी भी गई।

देव भूमि भारत हमेशा से संतों,ऋषियों,सहित अनेकों विभूतियों से समृद्ध रही है ऐसे ही उप्र के जिला आज़मगढ़ की अनेक विभूतियों-दुर्बासा ऋषि, दत्तात्रेय ऋषि, अल्लामा शिबली नोमानी, हरिऔध, राहुल सांस्कृत्यायन, कैफ़ी आज़मी, चित्रकार फ्रेंक वेस्ली की लड़ी में जन्में सामाजिक,आध्यात्मिक व व्यवहारिक चिंतक महान सन्त प्रेम नारायण लाल जिन्होंने सामाजिक और आध्यात्मिक चिंतन में अपना पूरा जीवन काल समर्पित किया। शुक्रवार को इस कवि सम्मलेन की शुरुआत ऑनलाइन माध्यम से लखनऊ से किया गया।

काम की बात: एक नहीं 6 फायदे हैं बेसन के, शायद ही किसी को पता होंगे

देर रात तक प्रेम नारायण लाल की 6वीं पावन स्मृति सप्ताह के दौरान आयोजित एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा सप्रेम संस्थान के तत्वावधान में सप्रेम कवि सभा के पटल पर गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन बृहद स्तर पर सम्पन्न हुआ। जिसमें देश के 9 प्रदेशों से 30 कवि, शायर व साहित्यकार शामिल होकर अपनी रचनाओं का जलवा बिखेरा साथ श्रोताओं की भी बड़ी संख्या जुडी रही। इस काव्य गोष्ठी का शीर्षक था- “ग़ज़ल के लिए जिले शिकवे भुला कर प्रेम करना ही इबादत है” और कविता के लिए “मिलवर्तन के पुष्प खिलाकर प्रेम-बग़ीचे को महकाएं”।

ज्ञातव्य हो कि ऑनलाइन होने वाला अब तक का सबसे लम्बा यह कवि सम्मेलन था जो लगभग तीन घण्टे चला।अंत मे कार्यक्रम ख़त्म होने पर भी लोग सप्रेम पटल को छोड़ना नहीं चाह रहे थे। इस प्रकार प्रेम पर आधारित यह काव्य गोष्ठी पूरे देश के प्रेम-प्रेमियों को सप्रेम जोड़ने में काफ़ी सफल रहा।

लेट नाइट पार्टियाँ कितनी सुरक्षित ?

इस काव्य गोष्ठी में कोलकाता से कमल पुरोहित अपरिचित, उड़ीसा से रचना त्रिपाठी, महाराष्ट्र से असीम आमगांवी, गुजरात से प्रतिभा पुरोहित, राजस्थान से मधुसूदन कलम घिसाई, मध्य प्रदेश से प्रज्ञेश, दिल्ली से सागर देहलवी, हरियाणा से जगन्नाथ सोनी और उप्र के वाराणसी से परमहंस तिवारी परम्, डॉ.माधुरी सिंह, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. मुक्ता श्रीवास्तव, कमलेश विष्णु सिंह जिज्ञासु, शुभ्रा श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता सिंह, शैलेन्द्र अम्बष्ट,आज़मगढ़ से साहिल, बांवला, डॉ.योग, नासमझ, प्रयागराज से जतन, शाहजहांपुर से विनीता चौरसिया, लखनऊ से गिरीश पांडेय, सीमीं सिद्दीकी, भूपेंद्र अस्थाना और गोरखपुर से दीपक ने अपनी रोचक रचनाओं से समां बाँधा। काव्य गोष्ठी में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गवासी माता जी को भी सप्रेम संस्थान द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई और अहमदाबाद गुजरात की कवित्री सुश्री गुजरात से प्रतिभा पुरोहित ने उनके सम्मान में कविता पाठ भी किया।

कार्यक्रम की सदारत गाजीपुर से अमित सहाय ने, गाजीपुर से अमित सहायआभार व समापन गाज़ियाबाद से इंजी. धर्मेंद्र अस्थाना ने और काव्य गोष्ठी के पहले दौर का संचालन वाराणसी से सप्रेम संस्थान व सप्रेम कवि सभा के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र अस्थाना तथा दूसरे दौर का संचालन रोहित अस्थाना ने किया। तकनीकी व्यवस्था लखनऊ से चित्रकार व कला लेखक भूपेंद्र अस्थाना ने किया।

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