आत्मनिर्भर भारत में विनोबा भावे की प्रेरणा

आचार्य विनोबा भावे समाज जीवन की सन्त परम्परा का निर्वाह करने वाले थे। वह राष्ट्र व समाज सेवा के प्रति समर्पित थे। कर्मयोगी की भांति सदैव इसी मार्ग पर चलते रहे। वह विषमता को मानवता के विरुद्ध मानते थे। इसी लिए उन्होंने ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध संघर्ष किया। वह महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। स्वतन्त्रता के बाद उन्हें लगा कि भारत में कुछ लोगों के पास आवश्यकता से बहुत अधिक भूमि है। जबकि करोड़ों लोग भूमिहीन है। इसलिए उन्होंने भूदान आंदोलन चलाया।राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने एक बेबीनार के माध्यम से विनोबा जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि महापुरूषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती है। बल्कि उसकी प्रांसगिकता युगों युगों तक कायम रहती है। समाज उनके विचारों से सदैव मार्गदर्शन प्राप्त करता रहता है। आचार्य विनोबा भावे जी ने गांधी जी के मार्ग को अपनाया। आजीवन वह उनके आदर्शों पर चलते रहे। संत स्वभाव के होने के बावजूद आचार्य विनोबा में राजनैतिक सक्रियता भी थी। उन्होंने सामाजिक अन्याय तथा धार्मिक विषमता का मुकाबला करने के लिए देश की जनता को स्वयंसेवी होने का आह्वान किया। आनंदीबेन पटेल ने हरिजन सेवक संघ द्वारा आचार्य विनोबा भावे की एक सौ पच्चीसवीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित वेबिनार गांधी इन न्यू एरा विनोबा जी को आज राजभवन से सम्बोधित किया। कहा कि आचार्य विनोबा भावे जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उनकी पूरी जीवन यात्रा समाज के उत्थान के लिए थी।

महाराष्ट्र धर्म के माध्यम से भी आचार्य विनोबा भावे ने देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। आचार्य विनोबा भावे को महान गुणों के कारण ही ‘संत’, ‘आचार्य’ तथा ‘ऋषि’ जैसी तीन विभूतियों से सम्मानित किया गया था। आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि देश के स्वतंत्र होने के बाद आचार्य विनोबा भावे ने भूदान और सर्वोदय आन्दोलन के माध्यम से समाज सुधार के स्वैच्छिक आन्दोलन की शुरूआत की। आचार्य विनोबा जी का मानना था कि भूमि का पुनर्वितरण सिर्फ सरकारी कानूनों के जरिए न हो,बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से इसे सफल बनाया जाए। विनोबा भावे जी ने पूरे देश में स्वयं जाकर लोगों से भूमिखण्ड दान करने का आह्वान किया, जिससे प्राप्त भूमि को भूमिहीनों को देकर उनका जीवन सुधारा जा सके।

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विनोबा जी ने इस आंदोलन के माध्यम से देश भर में पचास लाख एकड़ जमीन दान में प्राप्त कर भूमिहीनों को बंटवाई थी। विनोबा भावे की जन नेतृत्व क्षमता तथा व्यक्तित्व से प्रभावित होकर चम्बल के बीस डाकुओं ने आत्म समर्पण किया था। आचार्य विनोबा जी का कहना था कि नेतृत्व वही सफल हो सकता है, जो सबको साथ लेकर, सबका अपना होकर चले। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। सभी देशवासियों का कर्तव्य है कि वह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अपना योगदान दें। प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि और निर्णयों ने राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को बहुत सकारात्मक संदेश दिया है।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार के लिए महत्वपूर्ण कदम है। देश में कुटीर और लघु उद्योगों को बड़े पैमाने पर सहायता दी जा रही है। गांवों को आर्थिक रूप के साथ ही तकनीकी रूप में भी सक्षम बनाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गांव में कुटीर उद्योग होगा तभी भारत आत्मनिर्भर बनेगा। कठिन लड़ाई को एक अवसर में बदलने का प्रयास हमें करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने वोकल फार लोकल जैसे उद्घोष से भारतीय उद्यमिता को प्रेरित किया।

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
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