व्यापारी पुत्र के kidnapping की बरामदगी में गठित पुलिस टीम सक्रिय

फतेहपुर। चांदपुर थाना क्षेत्र के कस्बा अमौली निवासी नरेश चंन्द्र पुत्र स्व मोती लाल किराना व्यवसायी के 24 वर्षीय पुत्र दीपक ओमर के kidnapping के बरामदगी के लिए गठित पुलिस टीम रवाना हो चुकी है। दीपक 10 मार्च को सुबह लगभग 09 बजे अपने घर से व्यापार का सामान खरीदने व स्वयं का इलाज कराने के लिए कानपुर शहर जाने के लिये निकला था। शाम के समय लगभग 3 बजे परिजनों ने अपने पुत्र से उसके मोबाइल नं 9125273908 पर सम्पर्क किया। लेकिन उसका मोबाइल नंबर स्विच आफ बताने लगा।

  • जिसके बाद परिजनों के मन में अनहोनी होने की आशंका सताने लगी।
  • जिससे परिजनों ने रिस्तेदारों और संभावित ठिकानों पर फोन करना शुरू कर दिया।
  • लेकिन जब कहीं कोई सुराग नहीं लगा तो पिता नरेश ओमर ने स्थानीय चौकी में जाकर घटना की मौखिक सूचना दी।

kidnapping, पांच लाख रूपये लिये थे उधार, मिल रही धमकी

पुलिस ने जांच में पाया की जहां दीपक कुमार रुका था वहां उसके दो परिचितों से भी पांच पांच लाख रुपए उधार ले चुका है जो पैसा डूब चुका है। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार 13 मार्च को ही सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर परिजनों के मोबाइल पर मैसेज आना शुरू हो गया। जिस पर पैसे की मांग की गयी थी। 14 मार्च बुधवार को सुबह करीब 8 बजे मो नंबर 9125620908 से फोन पर परिजनों से कहा गया कि तुम्हें अपना लड़का प्यारा है कि पैसा। आप अपना लड़का सुरक्षित चाहते हैं तो तत्काल अपने लड़के के ही खाते मे पांच लाख रुपये जमा करा दीजियेगा।

  • पांच लाख रुपये फिरौती के लिये किये गये अपहरण से परिजनों में हड़कंप मच गया।
  • घर में भारी शोक छा गया है।
  • इस घटना से दीपक की बहनों भावना व रूपाली तथा मां राधा ओमर का रो-रो कर बुरा हाल है।
  • पिता नरेश चंन्द्र ने 14 मार्च बुधवार की देर रात दीपक की गुमशुदगी की रिपोर्ट चांदपुर थाने में दर्ज कराई।
  • धारा 364 A के तहत अपहरण का मुकदमा अज्ञात में दर्ज किया गया है।
  • इसके साथ पिता ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक फतेहपुर को भी प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।

सट्टेबाजी में लगा चुका है पैसा

वहीं परिजनों ने बताया कि दीपक सट्टेबाजी करता था उसके ऊपर काफी कर्जा हो गया था। कानपुर और अपने गांव में कई लोगों से कर्ज लेकर शेयर बाजार और सट्टेबाजी में गंवा चुका था। जिस की वापसी के लिए उस पर देनदारों का दबाव था। अपहृत की पहले दिन लोकेशन कानपुर में तथा दूसरे दिन SMS आने पर लोकेशन लखनऊ में मिली। इसी को आधार बनाते हुए 15 मार्च को थानाध्यक्ष श्रवण कुमार सिंह ने दो टीमें गठित कर लोकेशन के आधार पर लखनऊ व कानपुर भेजा है। इसमें क्राइम ब्रांच के सदस्यों को भी शामिल किया गया है। हालांकि पूर्व में पुलिस एक दूसरे पहलू पर भी विचार कर रही थी, एसओ चांदपुर श्रवण सिंह ने बताया था कि मामला संदिग्ध प्रतीक होता है। अतः स्थानीय पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानकर बयान बाजी कर रही थी। स्थानीय पुलिस को दीपक के दोस्तों ने यह भी बताया कि कर्ज में डूबे दीपक ने इसकी भरपाई के लिए अपने ही घर को निशाना बनाने की बात कही थी।

  • कुछ दिन पूर्व जिनसे कर्ज लिया था, 25000 को लेकर झगड़ा भी हुआ था।
  • स्थानीय पुलिस ने समझौता कराया था।
  • अपहृत के दोस्तों को सूचीबद्ध कर उनसे भी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
  • जिससे कोई सुराग मिल सके बाहरी तथा स्थानीय दोस्तों से संपर्क कर पूछताछ करने का प्रयास कर रही है।
  • परंतु अभी तक पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा है।

रिपोर्ट -डॉक्टर जितेंद्र तिवारी

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