स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

 डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी से स्वस्थ्य भारत योजना का शुभारंभ किया। कुछ दिन पहले भारत ने सौ करोड़ लोगों के वैक्सिनेशन का विशाल लक्ष्य हासिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नेतृत्त्व कुशलता से मिली उपलब्धि बताया है।

यह नरेंद्र मोदी का ही नेतृत्व है जिसने हेल्थ वैज्ञानिकों को सुविधा व प्रोत्साहन दिया। वैज्ञानिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए नरेंद्र मोदी स्वयं उनसे मिलने गए थे।

भारत को सबसे पहले कोरोना वैक्सीन बनाने का गौरव मिला। यह सभी प्रयास आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप थे। इसके पहले भारत अन्य बीमारियों संबन्धी वैक्सिनेशन में पिछड़ा हुआ माना जाता था।

इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने मेडिकल स्टाफ चिकित्सक व अन्य कोरोना योद्धाओं का समय समय पर मनोबल बढ़ाया। इस कार्य में देश ने एकजुटता का प्रदर्शन किया।

थाली ताली व दीप प्रज्वलन विलक्षण मनोविज्ञान की अभिव्यक्ति थी। इस तथ्य को विपक्षी नेता समझ ही नहीं सके। नरेंद्र मोदी स्वस्थ्य भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे थे। इन सभी प्रयासों से सौ करोड़ वैक्सिनेशन के लक्ष्य तक पहुंचना संभव हुआ। जबकि इस प्रक्रिया के प्रत्येक कदम पर विपक्ष का रुख नकारात्मक था। इन बाधाओं को नजरअंदाज करते हुए सरकार आगे बढ़ती रही। सौ करोड़ लोगों के वैक्सिनेशन के कुछ दिन बाद ही नरेंद्र मोदी ने काशी से चौसठ हजार करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री स्वस्थ भारत योजना का शुभारंभ भी किया।

इसके पहले भी योग, खेलो इंडिया,फिट इंडिया,सवच्छ भारत आदि के माध्यम से स्वस्थ्य भारत अभियान पर आलम किया जा रहा था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य परियोजनाओं के अलावा मेडिकल कालेज की संकल्पना चरितार्थ हो रही है। बीमारी पर खर्च को कम करने की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है। देश के पचास करोड़ लोगों के लिए आयुष्मान भारत योजना में लोगों को इलाज की सुविधा मिल रही है। देश में बाइस नये एम्स बन रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की शुरुआत की जा रही है।

इसमें चौसठ हजार करोड़ रुपये के प्राविधान के तहत हर जिले को करीब सौ करोड़ रुपये स्वास्थ्य के लिए मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष पहले तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल की उन्नीस सौ सीटें थीं। योगी सरकार के चार साल में ही इन सीटों की संख्या दोगुनी कर दी गई। इस अवधि में सोलह मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। तीस नए मेडिकल कॉलेजों पर तेजी से काम चल रहा है। रायबरेली और गोरखपुर में बन रहे हैं। केंद्र में मोदी सरकार से पहले देश में मेडिकल की सीटें नब्बे हज़ार से भी कम थीं। जबकि सात वर्षों में देश में मेडिकल की साठ हज़ार नई सीटें जोड़ी गई हैं।

गरीब को सस्ता इलाज मिले और उसे बीमारियों से बचाने के लिए देश में नई स्वास्थ्य नीति लागू की गयी। उत्तर प्रदेश में नब्बे लाख मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज मिला है। इस योजना की वजह से इन गरीबों के लगभग एक हजार करोड़ रुपए इलाज में खर्च होने से बचे हैं। हज़ारों जन औषधि केंद्रों से बहुत सस्ती दवाएं मिल रही हैं। कैंसर का इलाज,डायलिसिस और हार्ट की सर्जरी तक बहुत सस्ती हुई है, शौचालय जैसी सुविधाओं से अनेक बीमारियों में कमी आई है। बेहतर अस्पताल, डॉक्टर और दूसरे मेडिकल स्टाफ उपलब्ध करने के लिए व्यापक विजन के साथ काम किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद से पछली सरकार के समय तक सरकारी क्षेत्र में केवल बारह मेडिकल कॉलेज बनाये गए थे। जबकि नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में नौ मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया। एक जनपद एक मेडिकल कॉलेज का विजन जल्दी ही पूरा होगा। उत्तर प्रदेश में तीस मेडिकल कॉलेज प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अन्तर्गत खुल रहे हैं। इनमें से सात में दो वर्ष पहले ही एमबीबीएस की कक्षाएं प्रारम्भ हो चुकी हैं। नौ मेडिकल कॉलेज अब मेडिकल पढ़ाई शुरू हो गई है। चौदह नये मेडिकल कॉलेजों का वर्तमान में निर्माण कार्य प्रारम्भ हो रहा है।

तीस मेडिकल कॉलेजों का कार्य भारत सरकार के सहयोग और कुछ जनपदों में राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से आगे बढ़ाया है। एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो रहा है। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से स्वस्थ भारत समर्थ भारत की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। दिमागी बुखार से सबसे अधिक प्रभावित जनपदों में पीडियाट्रिक आईसीयू के साथ साथ इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेण्टर की स्थापना की गई। इन प्रयासों से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण करने में सफलता प्राप्त हुई।

हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया गया। हर घर को शौचालय देने की कार्यवाही आगे बढ़ी। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गयी। इससे दिमागी बुखार से होने वाली मृत्यु को पंचानबे प्रतिशत तक नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त हुई है।

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