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आखिर क्यो बिका 500 रुपये मे अखबार ??

मुरादाबाद- अक्सर आपने सुना होगा पुलिस वाले फ्री का माल हड़पने की वजह से चर्चा मे बने रहते है, परंतु क्या आपने सुना है पुलिस वाले एक अखबार के लिए पाँच सौ रुपये का भुगतान किया हो ? अगर कोई पुलिस कर्मी अपनी स्वेक्षा से एक अखबार के लिए 500 रुपए का भुगतान करे तो किसी आश्चर्य से कम नहीं है, परंतु यह आश्चर्य हकीकत मे बदला है। दरअसल मामला मुरादाबाद  जनपद के मामला मुरादाबाद पुलिस लाइन से जुड़ा हुआ है। जहां पर ट्रेनिंग कर रहे रिक्रूट आरक्षियों ने इसकी मिसाल पेश की है।

बताते चलें की ओमप्रकाश नामक एक बुजुर्ग पुलिस लाइन में अखबार बेचने आते हैं। बुजुर्ग अक्सर पैदल आते थे, कभी-कभी वो रिक्शे का सहारा लेकर भी लाइन आते थे। बुजुर्ग लाइन के सभी बैरकों मे घूम घूम कर अखबार बेचते थे जिसके एवज मे उन्हे 3 से 5 रुपये प्रति अखबार मिलता था। बुजुर्ग किसी तरह अखबार बेच कर अपनी रोजी रोटी चलाते थे।बुजुर्ग की इस कठिन परिश्रम पर एकदिन ट्रेनी आरक्षियों ने हकीकत से रूबरू होना चाहा। बुजुर्ग ओमप्रकाश ने आरक्षियों को बताया की पहले वे साइकल से अखबार बेचते थे परंतु बीते कुछ दिन पूर्व उनकी साइकल चोरी हो गयी थी,वह नयी साइकल लेने मे असमर्थ है। ओमप्रकाश की दयनीय कहानी सुनकर ट्रेनी रिक्रूट आरक्षियों का दिल भर आया और सभी ने समूहिक रूप से ओमप्रकाश की मदद करने की ठान ली। रिक्रूट आरक्षियों ने रातोंरात पैसें इकट्ठे किए और बुजुर्ग ओमप्रकाश के लिए नयी साइकल ले आए।

जब 500 रुपये मे बिका एक अख़बार

अगले दिन सुबह ओमप्रकाश जब अख़बार लेकर पुलिस लाइन पहुंचे सारे आरक्षी एक जगह इकट्ठे थे व उनसे कहा ताऊ आज से आप बैरक ने घूम-घूमकर अख़बार नहीं बेचेंगे। ओमप्रकाश पुलिस की गुंडई की कहानी से बख़ूबी वाकिफ थे आरक्षियों द्वारा यह फरमान सुनकर उनके हाथ पाँव काँपने लगे व बिना कुछ पुछे माफी मांगने लगे। इस पर आरक्षियों ने उन्हे गले लगा लिया और बोले ताऊ आप अख़बार एक जगह रख दिया करो हम सभी खुद अख़बार ले लेंगे। इनमे एक एक आरक्षी आगे बढ़ा व अख़बार का बंडल उठा कर खुद अख़बार बेचने लगा। बुजुर्ग की दयनीय कहानी सुनकर आरक्षियों ने अपनी श्रद्धानुसार (500 , 100 , 50 ) रुपयों मे अख़बार ख़रीदना शुरू कर दिया।

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आंखो से बहे अश्रुधारा

चंद मिनटों मे अख़बार से इतनी मोटी कमाई से ओमप्रकाश गदगद हो गए। वह दिल से सभी आरक्षियों को दुआ दे रहे थे, तभी उनकी खुशी अचानक दुगुनी हो गयी और उनकी आंखो से खुशी के अश्रुधारा बह निकली। दरअसल अख़बार खरीदने के बाद आरक्षियों ने ओमप्रकाश को तोहफे मे एक चमचमाती साइकल भेंट किया। आरक्षियों ने ओमप्रकाश को साइकल देते हुये कहा ताऊ आज से आप पैदल या रिक्शा से नहीं अपनी साईकिल से अखबार बेचना। बाद में सभी ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा किया।

आरक्षियों का यह कृत्य पूरे देश मे चर्चा का विषय बना हुआ है, हर कोई आरक्षियों के द्वारा ओमप्रकाश को की गयी मदद की सराहना कर रहा है।

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