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साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मानते हुए अपने शरीर को प्रधान मान लेता है – पं राज नारायण त्रिपाठी

• मंगलाचरण, चौबीस अवतार, परीक्षित जन्म और शुकदेव आगमन की कथा सुन कर भावि-विभोर हुए श्रोता

औरैया। श्रीमद् भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) के दूसरे दिन कथा वाचक पं राजनारायण त्रिपाठी (Pt. Raj Narayan Tripathi) ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ मंगलाचरण और परीक्षित जन्म की बहुत ही रोचक एवं सारगर्भित कथा सुनाई।

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उन्होंने कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मो द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संघार किया करते हैं।

उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। व्यास त्रिपाठी जी ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मानते हुए अपने शरीर को प्रधान मान लेता है, जबकि शरीर नश्वर है।

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उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है। द्वितीय दिवस की कथा में व्यास त्रिपाठी जी ने आगे परीक्षित जन्म की पावन कथा को सुनाया, बताया कि अपने जीवन को सफल बनाने के लिए भगवान की कथा का आश्रय लेना अति आवश्यक है। हम लोग हर कार्य हेतु सभी प्रकार की तैयारी करते हैं, लेकिन ईश्वर की शरण मे जाने की कोई तैयारी नहीं करते।

परीक्षित जी ने तो जीवन सफल बनाने की 7 दिन में ही तैयारी कर ली थी, हर दिन अंतिम यात्रा एवं जन्म को सफल बनाने के लिए तैयारी करनी चाहिए। परीक्षित जी का जन्म कैसे हुआ, परीक्षित जी को गर्भ में ही भगवान ने दर्शन दिए, अश्वत्थामा द्वारा किए गए प्रहार से किस प्रकार श्रीकृष्ण जी ने गर्भ में उनकी रक्षा की और परीक्षित जी के जन्म की पावन कथा बड़ी ही मार्मिक ढंग से व्यास जी ने सुनाई।

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भागवत कथा के इस शुभ अवसर पर पंडाल में परीक्षित हरिश्चंद्र वर्मा व नीलम वर्मा, नरेंद्र सिंह कुशवाह(PTI), चंद्र शेखर सिंह चौहान, दशरथ सिंह चौहान, राम सिंह पाल, दिनेश सिंह कुशवाह, विकास प्रताप सिंह, विशाल प्रताप सिंह, विवेक वर्मा, हिमांशु वर्मा, शैलेंद्र कुमार, नमन कुमार, निखिल कुमार, गोपाल, हिमांक, रचना, प्रीति, कंचन, प्रज्ञा आदि के साथ बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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रिपोर्ट – संदीप राठौर चुनमुन

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