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यूरोप में वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं के माध्यम से राष्ट्रीय हितों का संरक्षण व संरक्षण करते है। इसके साथ ही वह भारतीय संस्कृति के मनवतावादी विचार से दुनिया को परिचित कराते है। रूस यूक्रेन संघर्ष ने दुनिया में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता बढा दी है। इसके अलावा आतंकवाद व सभ्यताओं के संघर्ष भी चलता रहता है। अन्य सभ्यताओं के पास इस समस्या का कोई समाधान नहीं है। जबकि भारत ने सदैव मानव कल्याण की कामना की है। नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के बाद स्वीडन में भी भारतीय चिंतन के अनुरूप विचार व्यक्त किये।

उन्होंने महोपनिषद की सूक्ति का उल्लेख किया-

बन्धुरयं नेति गणना लघुचेतसाम्  उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥

अर्थात यह मेरा है और यह नहीं है,इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो धरती ही परिवार है।

मोदी नर कहा कि हमारी भाषा,पहनावा,खान पान चाहे जो है किंतु।हर भारतीय के दिल में वसुधैव कुटुंबकम बसता है। वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दुनियाभर के लोगों के साथ भारत में भी लोगों को देना है। दुनिया को तबाह करने में हिन्दुस्तानियों की कभी कोई भूमिका नहीं है। वैश्विक चुनौतियों से मूकबले के लिए भारत की क्षमता में निवेश करना दुनिया के हित में है। भारत की उपलब्धि का लाभ बीस प्रतिशत मानवता को मिलता है।


भारत द्वारा कोरोना वैक्सीन का निर्माण इसका उदाहरण है। नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त रूप से डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और डेनमार्क के क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक डेनमार्क उद्योग परिसंघ में भारत डेनमार्क व्यापार मंच में भागीदारी की। ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के पूरक कौशल पर जोर दिया और डेनिश कंपनियों को हरित प्रौद्योगिकियों, कोल्ड चेन,कचरे से धन, शिपिंग और बंदरगाहों जैसे क्षेत्रों में भारत में उपलब्ध विशाल अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

हरित प्रौद्योगिकी,नवाचार और डिजिटलीकरण, ऊर्जा स्वतंत्रता और नवीकरणीय ऊर्जा,जल, पर्यावरण और कृषि, बुनियादी ढांचा,परिवहन और सेवाएं क्षेत्र सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों के बीच हुए करारों से जुड़े दस्तावेजों का आदान प्रदान किया गया। दोनों देशों के बीच स्वच्छ जल,शिपिंग, पशुपालन व डेयरी, संस्कृति,कौशल विकास, तकनीकी निवेश और वाणिज्य से जुड़े क्षेत्रों में करार हुए हैं। भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों, हिन्द प्रशांत और यूक्रेन सहित क्षेत्रीय तथा वैश्विक विषयों पर विचार विमर्श किया गया। दोनों देशों ने मुक्त,खुले, समावेशी एवं नियम आधारित हिन्द-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

दो सौ से अधिक डेनिश कंपनियां भारत में पवन ऊर्जा, शिपिंग,कंसलटेंसी, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं। भारत में बढ़ते ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और व्यापक आर्थिक रिफॉर्म का इन कंपनियों को लाभ मिल रहा है। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन उद्योग क्षेत्र में डेनिश कंपनियों और डेनिश पेंशन फंड के लिए निवेश के अवसर हैं। दोनों देशों की एक मजबूत हरित रणनीतिक साझेदारी के नतीजे सामने आने लगे हैं। डेनमार्क भारत को फॉसिल फ्यूल का विकल्प हासिल करने में सहायता कर रहा है। दोनों देशों के बीच इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी हुई।

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