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पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध, पत्रकारों का प्रतिनिधि मण्डल एसपी से मिलेगा

रायबरेली। लालगंज तहसील परिसर में पत्रकार धर्मेन्द्र पाण्डेय पर हुए जानलेवा हमले में पुलिस धाराएं लगाने में खेल कर गयी। सिर्फ मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। जबकि तहरीर में स्पष्ट रूप से गला दबा कर जान से मारने का प्रयास करने का उल्लेख है। बावजूद इसके जानलेवा हमले की धारा 307 लगायी ही नहीं। इससे पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है। इसको लेकर जल्द ही पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमण्डल एसपी से मुलाकात कर अपनी बात रखेगा।
बताते चले कि निकट बस स्टेशन आलमपुर निवासी पत्रकार धर्मेन्द्र पाण्डेय के भाईयों ने ग्राम मलपुरा में जरिए बैनामा प्लाट क्रय किये हैं।  जिसका दाखिल खारिज बाद  न्यायालय तहसीलदार लालगंज के यहां वाद विचाराधीन है। जिसकी पैरवी पत्रकार धर्मेन्द्र पाण्डेय ही करते हैं। बीते गुरुवार को तहसीलदार ने फोन करके कहा कि प्रतिवादी राजेंद्र तिवारी उर्फ रज्जन तिवारी अपनी बात कहना चाहते हैं आ जाइए।
तहसीलदार की सूचना पर बाइक से तहसील लालगंज पहुंचा और बाइक खड़ा करके तहसीलदार महोदय से मिला तो उन्होंने कुछ देर इंतजार करने को कहा। करीब 12ः30 । वह लालगंज के चैनल गेट गेट के पास इंतजार करने लगा, तभी विपक्षीगण गाली गलौज करते हुए एक राय होकर पीड़ित पर जानलेवा हमला बोल दिया था। विपक्षी सुंदरलाल बाजपेई और इंदु प्रकाश सिंह ने पीड़ित का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया था। इसी बीच विपक्षी राजेंद्र चौधरी ने पीड़ित की बाई आंख पर जोरदार थप्पड़ मारा जिससे उसको धुंधला दिखाई देने लगा था।
इसी बीच विपक्षी अजय कुमार ऊर्फ पप्पू और गया प्रसाद यादव लात घूसों से लगातार मारते रहे। इस दौरान तहसील लालगंज  परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी और भयवश वादकारी गण दुबक गए थे। पीड़ित ने किसी तरह भागकर  उप जिलाधिकारी महोदय के चैम्बर में घुसकर जान बचाई। विपक्षीगण ललकारते रहे कि आज तो किसी तरह बच गए और भविष्य में तहसील लालगंज में दिखाई दिए तो जान से मार देंगे। जानलेवा हमले के दौरान उसके कपड़े भी फाड़ डाले थे। जानलेवा हमले में कई अन्य लोग भी शामिल रहे थे।
एसडीएम सूचना पर थाना कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची थी। इसके बाद पत्रकार धर्मेन्द्र पाण्डेय ने कोतवाली पहुंचकर मामले की तहरीर दी थी। पत्रकार पर जानलेवा हमले में पुलिस ने धाराएं लगाने में खेल कर गयी। सिर्फ मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। जबकि तहरीर में स्पष्ट रूप से गला दबा कर जान से मारने का प्रयास करने का रूप्ष्ट उल्लेख है। बावजूद इसके जानलेवा हमले की धारा 307 लगायी ही नहीं। इससे पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है। इसको लेकर जल्द ही पत्रकारों का प्रतिनिधिमण्डल एसपी से मुलाकात कर अपनी बात रखेगा।
रिपोर्ट-दुर्गेश मिश्रा 

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