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दुनिया की ऐसी 10 महिलाएं जिनके बिना अधूरा है इतिहास

आज समूचा विश्व अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाया रहा है। इस दिन देश और दुनिया की उन १० महिलाओं के बारे में बात न किया जाये यह नाकाफी होगी। करोड़ों दिलों में जगह बना चुकी इन महिलाओं के बिना दुनिया भर का इतिहास अधूरा है।
मदर टेरेसा:
इनका जन्म मेसेडोनिया गणराज्य में हुआ था,1948 में वह भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं। उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी। पांच सितंबर, 1997 को उनका निधन हो गया था।मदर टेरेसा को बीते साल सितंबर में वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने संत की उपाधि दी थी ।

 

 

 

 

 

मर्लिन मोनरो:
मर्लिन मोनरो मशहूर अमेरिकन फिल्म एक्ट्रेस और मोडल थी। इनके करियर की शुरुआत पिन-अप मॉडल के रूप में हुई थी। इनके कुछ लोकप्रिय कार्यों में 1953 में हाउ टू मैरी ए मिलेनियर है।

 

 

 
डायना प्रिंसेस:
ब्रिटेन के एक शाही कुलीन परिवार से जुड़ी डायना प्रिंसेस प्रिंस चार्ल्‍स की पहली पत्‍नी थीं। वेल्स की इस राजकुमारी को कॉर्नवाल की डचेज, रोथसे की डचेज, चेस्टर की काउंटेस की उपाधियाँ मिलीं।

 

 

 

 

 

आंग सान सू की:
बर्मा में लोकतंत्र के लिए सैनिक सरकार का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने ‍वाली ‘आंग सान सू की’ पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई हैं। उन्‍हें बर्मा की सैन्य सरकार ने कई वर्षों तक घर पर ही नजरबंद रखा था।

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल: 
आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता फ़्लोरेन्स को दया व सेवा की प्रतिमूर्ति “द लेडी विद द लैंप” के नाम से भी पुकारा जाता है। एक नर्स के रूप में उन्‍होंने बीमार और गरीब लोगों की अपने जीवन काल में खूब सेवा की है।

एलिजाबेथ:
इग्‍लैंड की पहली महारानी एलिजाबेथ का नाम न लिया जाना इतिहास की तौहीनी होगी। 31 दिसम्बर, 1600 को भारत में ‘दि गर्वनर एण्ड कम्पनी ऑफ लन्दल ट्रेडिंग इन टू दि ईस्ट इंडीज’की स्थापना हुई । एलिजाबेथ के शासनकाल के दौरान इंग्लैण्ड ने कई अहम उपलब्धियों को हासिल किया।

इंदिरा गांधी:
अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए प्रख्यात इन्‍हें ‘लौह-महिला’ के नाम से भी पुकारा जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्‍व में 1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी और इसमें पाक को जबरदस्‍त धूल चटाई।

मेरी क्यूरी:
मेरी ने रेडियम की खोज की थी। सबसे खास बात तो यह है कि दुनिया की पहली महिला नोबेल पुरस्कार विजेता थी। इन्‍हें 1903 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

मलाला युसूफजई:
पाकिस्तान में रूढि़वादी तत्वों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही मलाला महज 14 साल की उम्र से ही बिना डरे इनकी खिलाफत करने लगी।इसकी वजह से तालिबान ने उस पर कई बार जानलेवा हमला भी किया।

एंजेला मर्केल:
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल जर्मनी की पहली ऐसी महिला हैं,जिसने इतने बड़े पद को संभाला है। क्रिस्टियन डेमोक्रेटिक यूनियन (जर्मनी) का नेतृत्व करने वाली एंजेला 2014 में फोर्ब्‍स की सूची टॉप 10 महिलाओं की सूची में शामिल हुई थी। इस सूची में मर्केल को प्रथम स्थान मिला।

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