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राजस्थान में पान मसाला और फ्लेवर्ड सुपारी पर बैन,विशेषज्ञों ने जताया आभार

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश में मेग्निशियम कार्बोनेट निकोटिन युक्त तंबाकू, मिनरल आयॅल युक्त पान मसाला और फलेवर्ड (सुगंधित) सुपारी के उत्पादन, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने पर कैंसर रोग विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व चिकित्सा एंव स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा का आभार जताया है। महाराष्ट्र, बिहार के बाद अब राजस्थान इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने वाला तीसरा राज्य बन गया है।

सवाई मानसिंह अस्पताल के नाक,कान गला रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डा.पवन सिंघल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खाध सुरक्षा अधिनियम के तहत मेग्निशियम कार्बोनेट निकोटिन युक्त तंबाकू, मिनरल आयॅल युक्त पान मसाला और फलेवर्ड (सुगंधित) सुपारी के उत्पादन, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने से कैंसर जैसी बीमारी से युवाओं को बचाया जा सकेगा। चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का उपयेाग मुंह के कैंसर का प्रमुख कारा है। इसी से 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर होता है। इसमें युवा अवस्था में होने वाली मौतों का मुख्य कारण भी मुंह व गले का कैंसर है।

डा.सिंघल ने बताया कि इसमें खासतौर पर चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग प्रमुख है, जिसके कारण 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर होता है। वर्तमान में तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियों से प्रदेशभर में 77 हजार लोगों की मौत प्रतिवर्ष हो रही है। उन्होने बताया कि पूर्व में राजस्थान की इस स्थिति पर कैंसर रोग विशेषज्ञ ने बहुत ही चिंता जताई थी और सरकार से तबांकू उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, जिसमें पान मसाला भी शामिल है।

राजस्थान की स्थिति
ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे 2017 की रिपोर्ट में पाया गया है कि 21.4 प्रतिशत धूम्रपान रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं जबकि 10.7 प्रतिशत धूम्रपान करते हैं। जिसका मुख्य कारण 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर है। राजस्थान में वर्तमान में 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रुप में तंबाकू का सेवन करते है, जिसमें 22.0 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलांए शामिल है। यहां पर 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करते हुए है, जिसमें 22.0 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाए है।

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