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17 दिन टनल में रहने से क्या मजदूरों को हो सकती हैं आंखों की बीमारियां? एक्सपर्ट से जानें

17 दिन के संघर्ष के बाद आखिर उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल से मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है. इससे मजदूरों के परिजनों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है. मजदूर 17 दिन तक टनल में थे. टनल में बाहर की तुलना में रोशनी कम होती है. साथ ही धूल- मिट्टी भी होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मजदूरों को कम रोशनी और धूल -मिट्टी की वजह से आंखों की कोई बीमारी हो सकती है? आइए इसके बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में आई डिपार्टमेंट के एचओडी और प्रोफेसर डॉ. एके ग्रोवर बताते हैं कि टनल में रोशनी कम होती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि मजदूरों को इससे आंखों की कोई बीमारी हो सकती है. हां, ये है कि बाहर निकलने के कुछ मिनटों तक उनको हल्का धुंधला दिख सकता है, लेकिन इससे कोई खास समस्या नहीं होगी. कुछ घंटों बाद आंखें बाहर के माहौल के हिसाब से ढल जाएंगी और कोई परेशानी नहीं होगी.

डॉ ग्रोवर बताते हैं कि आंखें इस हिसाब से काम करती हैं कि वह कम रोशनी में भी खुद हो एडजस्ट कर लेती हैं. ऐसे में कम रोशनी से किसी तरह की बीमारी या रेटिना में कोई इंफेक्शन होने का खतरा नहीं है. न ही मजदूरों को आंखों की कोई गंभीर बीमारी होने की आशंका है.

अधिक उम्र में होता है खतरा

डॉ ग्रोवर बताते हैं कि अंधेरे में रहने से 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को इस तरह की परेशानी हो सकती है, लेकिन जो मजदूर हैं वह इस तरह के काम करते हैं तो ऐसी किसी समस्या होने का खतरा नहीं है. जहां तक बात धूल की वजह से इंफेक्शन की है तो उसको लेकर आंखों में पानी आने की कुछ समस्या हो सकती है, लेकिन इससे आंखों की रोशनी संबंधी कोई बीमारी होने का खतरा नहीं है.

एक बार जांच जरूरी

डॉ ग्रोवर कहते हैं कि टनल से निकले मजदूरों को आंखों की कोई बीमारी होने की आशंका तो नहीं है, हालांकि फिर भी बाहर आने के बाद पूरी बॉडी के चेकअप के साथ- साथ आंखों की जांच होना भी जरूरी है. अगर कोई परेशानी हुई है भी होगी तो उसका इलाज हो जाएगा. टनल में रहने से किसी गंभीर समस्या होने का कोई खतरा नहीं है.

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