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बेबस होकर शिक्षकों ने सरकार के समक्ष रखी मांग, जिन्दा रहे या मर जाएं!

औरैया/बिधूना। प्राइवेट अध्यापकों की इस कोरोना काल में कोई न तो सुध लेने वाला है और न ही कोई विचार करने वाला है। पिछले 4 महीनो से प्राइवेट अध्यापक व कोचिंग संचालक अपनी जमा पूंजी से खर्च चला रहे हैं, बावजूद इसके कोई उनकी सुध नहीं लेने वाला नही है। क्या प्राइवेट अध्यापक/ कोचिंग संचालक खाना नही खाते? क्या उनका बिजली का बिल नहीं आता? क्या उनका परिवार नही है? सबके लिये नियम बन गये हैं। हर नियम की धज्जियां उडाई जा रही हैं। जब बाजार खुल सकते हैं, बसें चल सकती हैं, शराब के ठेके खुल सकते हैं, तहसील खुल सकती है तो कोचिंग से जुड़े लोगों पर प्रतिबन्ध लगाकर इस प्रोफेशन से जुड़े लोगों के साथ शासन ने दोहरा रवैया अपना रखा है।

नगर में प्राइवेट ट्यूशन देकर घर चलाने वाले ऋषभ त्रिवेदी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि शासन/प्रशासन ने दोहरी निति अपनाते हुए स्कूल व कोचिंग संचालकों पर अंकुश लगाकर उनका जीना मोहाल कर दिया है। परिवार वालों के लिए दो जून की रोटी की दिक्कत धीरे धीरे उत्पन्न होने लगी है।

जहां एक एक करके हर चीज से प्रतिबन्ध हटाया जा रहा है ऐसे में विद्यालय व कोचिंग सेंटर पर लगातार प्रतिबन्ध जारी है, जिससे आर्थिक तंगी के चलते इस प्रोफेशन से जुड़े लोगों का जीना दूभर होता जा रहा है। एक तरफ ऑनलाइन शिक्षा निति से बच्चों की सेहत ख़राब हो रही तो वहीं उनकी शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है। अगर सरकार चाहे तो सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विद्यालय व कोचिंग चलने की छूट दे सकती है।

ऋषभ त्रिवेदी ने कहा, शिक्षक देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं उनको नजर अंदाज करना गलत है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध करते हुए कहा कि वो प्राइवेट स्कूल व कोचिंग सेंटरों की तरफ भी अपना ध्यान केंद्रित करें जिससे कि इससे जुड़े शिक्षक जीवन यापन कर सकें।

रिपोर्ट-अनुपमा सेंगर

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