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बिधूना में मनायी गयी कबीर जयंती, कबीर दोहों को पढ़ने पर दिया जोर

मुनागंज के कबीर विज्ञानाश्रम हरिहर बाग में हुआ आयोजन

औरैया / बिधूना। अछल्दा क्षेत्र के गांव मुनागंज के कबीर विज्ञानाश्रम हरिहर बाग में मंगलवार को संत कबीर दास के 645वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी। इस मौके पर आश्रम के महंत राम शरण दास ने कबीर दोहों को पढ़ने पर जोर देने के साथ ज्ञान गुदड़ी का वाचन किया। उन्होंने कहा कि कबीर दास ने अपनी शिक्षाओं में परमात्मा की भक्ति पर जोर दिया है।

कबीर जयंती के मौके महंत राम शरण दास ने कहा कि कबीर दास ने मध्यकालीन भारत के सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में अपना अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने दोहों, विचारों और जीवनवृत्त से तत्कालीन सामजिक, आर्थिक, धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में क्रांति का सूत्रपात किया था। उन्होंने मध्यकालीन भारत के तत्कालीन समाज में व्याप्त अंधविश्वास, रूढ़िवाद, पाखण्ड का घोर विरोध किया। कबीर दास ने उस काल में भारतीय समाज में विभिन्न धर्मों और सामजिक लोगों के बीच आपसी मेल-जोल और भाईचारे का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने हिंदू, इस्लाम सभी धर्मों में व्याप्त कुरीतियों और पाखण्ड़ो पर कड़ा प्रहार करते हुए हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा का विरोध किया।

महंत राम शरण ने कबीर के दोहों का वाचन करते हुए जनसमूह को सन्त कबीर के बताये रास्ते पर चलने का आग्रह किया। उन्होेंने कहा कि कबीर दास ने अपनी शिक्षाओं में परमात्मा की भक्ति पर जोर दिया है। वे अपनी वाणी में कहते हैं, ‘‘दुर्लभ मानुष जन्म है देह न बारम्बार। तरुवर ज्यों पत्ता झड़े बहुर न लागे डार।’’ कहा कि कबीर दास हिन्दू धर्म तथा इस्लाम धर्म में व्याप्त कुरीतियों के निर्भीक आलोचक थे। उन्होंने अपनी वाणी में अहिंसा, सत्य, सदाचार आदि पर विशेष बल दिया था। अपनी सरलता, साधु स्वभाव तथा सन्त प्रव्रत्ति के कारण बहुत से हिन्दू तथा मुस्लिम धर्म के अनुयायी उनके शिष्य बने। कबीर दास तो केवल मानव धर्म में विश्वास रखते थे। उन्होंने पत्थर और मूर्ति पूजा का विरोध किया। ‘‘पाथर पूजैं हरि मिलें तो मैं पूजूँ पहाड़, वाते तो चाकी भली पीस खाय संसार।’’

उन्होंने कहा कि शासक वर्ग द्वारा कमजोरों और असहायों पर किये जाने वाले जुल्मों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए सन्त कबीर चेतावनी भरे शब्दों में कहते हैं कि ‘‘दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय। बिना जीव की श्वास से, लोह भसम हो जाय।’’ कहा कि आधुनिक समय में जहां चारों तरफ जातिवाद, धार्मिक कर्मकांड, आपसी वैमनस्यता और कट्टरता का बोलबाला है, ऐसे समय में कबीर के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। इससे पूर्व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कबीर दास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया। इस मौके पर महंत जीवन दास, राम मणि दास, हंस मणि दास, राम लखन दास के अलावा होम चन्द्र, प्रमोद कुमार, सोनू सिंह, अनिल कुमार, देवेश कुमार, योगेश कुमार, लालू गौतम, राहुल सिंह, मुहर सिंह, अमर सिंह, रिंकू सिंह, कर्णेश कुमार, सिया देवी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

रिपोर्ट – शिव प्रताप सिंह सेंगर 

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