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फोटो जर्नलिस्ट हरि कृष्ण गोस्वामी का निधन, पत्रकारों में शोक 

अयोध्या लगभग चार दशक पहले अखबार में फोटो पत्रकार बनने का जुनून लेकर अपना सब कुछ दांव पर लगाने वाले मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के हरि कृष्ण गोस्वामी का केवल अब नाम बचा है। वह अब नहीं रहे। बीते ढाई दशक से उनके संघर्षों को मैने भी देखा है।

अक्सर बताते थे कि पहले फोटो खींचने के बाद देने के लिए लखनऊ तक जाना पड़ता था। फिर दो दिन बाद छपी फोटो देख लेने मात्र से संतोष हो जाता था। इन्होंने जीवन में कई स्याह सत्य से परिचय कराया कि हुनर के साथ भाग्य का साथ देना भी बहुत जरूरी है।

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जीवन भर फोटोग्राफी के क्षेत्र में संघर्ष करने वाले श्री गोस्वामी को कोई स्थाई बैनर नहीं मिला। जिसे वे अपना कह सकते। जिले के कई अखबार उनके हुनर को गाहे- बगाहे स्थान जरूर देते रहे। वे कहते थे जिन्हे कैमरा पकड़ना तक नही आता उन्हें सब जानते हैं। अपने संघर्षों को याद करते हुए और हंसकर वे अक्सर कहते थे कि उन्हें अखबार के बंडलों के बीच जलाया जाए तो उनके लिए यही खुशी की बात होगी।

पत्रकार इंदुभूषण पांडेय, प्रेस क्लब संरक्षक शहरि कृष्ण अरोड़ा, अध्यक्ष सुरेश पाठक, अरशद अफजाल खान, बीएन दास, रमा शरण अवस्थी, आदर्श शुक्ला, रामकुमार सिंह, अनुराग शुक्ल, विमलेश तिवारी, उग्रसेन मिश्रा सहित सभी ने दुख व्यक्त किया है और ईश्वर से प्रार्थना की है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

फोटो जर्नलिस्ट हरि कृष्ण गोस्वामी का निधन, पत्रकारों में शोक फोटो जर्नलिस्ट हरि कृष्ण गोस्वामी के निधन पर उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (उपज) ने शनिवार को गहरी संवेदना व्यक्त की। उपज पदाधिकारी ने गोस्वामी के निधन को अपूर्णीय क्षति बताया। प्रांतीय पदाधिकारी त्रियुग नारायण तिवारी सहित जेपी तिवारी, जयप्रकाश सिंह, वीएन दास व नाथबख्श सिंह ने गोस्वामी के निधन पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। दैनिक देशबंधु के ओम प्रकाश सिंह (उपज जिला अध्यक्ष), दैनिक राष्ट्रीय सहारा के विवेकानन्द पाण्डेय (ज़िला महामंत्री), रवि प्रकाश पाठक, मनोज पांडेय, राम अजोर वर्मा, प्रोफेसर कृष्ण मुरारी सिंह, आनन्द स्वरूप गौड़, संदीप अग्रवाल, मधुकर पांडे, मनोज पांडेय, सतीश पाठक, समर सलिल के जय प्रकाश सिंह, त्रिलोकी नाथ द्विवेदी, अजय कुमार त्रिपाठी, प्रशांत शुक्ला, नानक चंद्र गुप्ता ने भी दुःख व्यक्त किया है।

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पदाधिकारी ने कहा कि गोस्वामी ने उन विपरीत परिस्थितियों में फोटोग्राफी की, जब आज के दौर का डिजिटल जमाना नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्य करते हुए महारथ हासिल कर ली थी। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।

रिपोर्ट-जय प्रकाश सिंह

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