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संस्कृति के अनुरूप शिक्षा नीति

नई शिक्षा व्यवस्था नीति भारत की सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप है। इस प्रकार की शिक्षा के माध्यम से ही चरित्र का निर्माण और सद्गुण का विकास होगा। विद्या भारती के अखिल भारती राष्ट्रीय संगठन मंत्री यतींद्र जी ने कहा कि लंबी चिंतन चर्चा के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा हम सबके बीच आया है। स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय शिक्षा का स्वरूप हम सबके बीच आया है। यह मसौदा है इसको जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी हम सब की है। शिक्षा राष्ट्र के लिए सर्वाधिक महत्व का क्षेत्र है। इस राष्ट्र को तेजस्वी,महान शक्ति संपन्न बनाने में सब प्रकार के गुण और व्याधियों से मुक्त शिक्षा महत्वपूर्ण है। बुनियादी शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। परिवार,

विद्यालय, समाज का नीतियां बनाते समय ध्यान देना होगा। अतीत के अनुभव वर्तमान की चुनौतियां, भविष्य के भारत का निर्माण कैसे हो इसका ध्यान इस नीति को बनाने में हुआ है। निरक्षरता,कुपोषण से देश को मुक्त करना है। यतीन्द्र जी ने विद्या भारती के लखनऊ केंद्र द्वारा आयोजित बेबीनार में यह विचार व्यक्त किये। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि नई शिक्षा में सबसे ज्यादा काम प्रारंभिक शिक्षा पर हुआ है। लाखों लोगों से विचार विमर्श के बाद एक संतुलित बहुआयामी शिक्षा नीति सामने आई है।

प्री प्राइमरी के विषय को अपने प्रदेश के अनुसार सभी शिक्षण संस्थानों में लागू करने की आवश्यकता है। बच्चों के पोषण के लिए इसको आंगनबाड़ी से सबद्ध किया गया है। आठवीं पास करने के बाद ही बच्चों को मनपसंद विषय चुनने की स्वतन्त्रा होगी। प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होगी। इतिहास,संस्कृति, विरासत हमारे पाठ्यक्रमों का अंश है। त्रिभाषा फार्मूला, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता,रोजगार आदि पहलू भी शिक्षा नीति में समाहित है। भारती शिक्षा शोध संस्थान, सचिव डॉ. आईपी शर्मा ने कहा कि पाठ्यक्रम स्थानीय विशेषताओं, स्थानीय भाषा के आधार पर निर्मित होना चाहिए।

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एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में नैतिक सिद्धांत, भारतीय परंपरा, देश के एतिहासिक धरोहरों का समावेश नहीं है। आज कल के छात्र इन सब बातों को भूल चुके है। इस कारण पाठ्यक्रम में इसे सम्मिलित करने की आवश्यकता है। शिक्षकों को अवार्ड देने की प्रक्रिया,अच्छे और उत्साहित शिक्षकों को लीडरशिप में लाना चाहिए। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति का सूत्र अभाव से विकास की ओर अंतरण है। पठन की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा। इस नीति में इसके बारे में भी कहा गया है।

विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ जय प्रताप सिंह ने कहा कि यह शिक्षा नीति भारतीय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के सहायक होगी। पिछले कुछ वर्षों पूर्व के विदेशी शिक्षा मॉडलों को कॉपी किया गया है, जिसके कारण हम अपने उद्देश्य से अलग हो गए। युवा शक्ति को समस्या नहीं समाधान बनाने के लिए इस नई शिक्षा नीति में गंभीरता से विचार किया गया है।

ऐसी शिक्षा समाज के लिए अधिक उपयोगी होगी। देश में जागरूकता बनाने का काम 25 सितंबर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म जयंती से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक नई शिक्षा नीति 2020 पर जागरूकता बढ़ाने का काम किया जाएगा। बालिका शिक्षा प्रभारी उमाशंकर मिश्र ने लोगों का आभार व्यक्त किया। बेबीनार का आयोजन सरस्वती कुंज निराला नगर स्थित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया उच्च तकनीकी डिजिटल सूचना संवाद केंद्र द्वारा किया गया। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा ने सभी सहभागियों का स्वागत किया।

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
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