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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से…परधानी क्यार चुनाव

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

आज प्रपंच चबूतरे का रंग-रोगन चल रहा था। चबूतरे के पास ही 10-12 नई कुर्सियां और दो नए तख्त भी पड़े थे। चतुरी चाचा को प्रधान पद के उम्मीदवार किंकर महाराज कुछ समझा रहे थे। बगल में मुन्शीजी व कासिम चचा विराजमान थे। मेरे पहुंचते ही किंकर महाराज खड़े हो गए। पंडितजी बोले- पत्रकार भैया, चतुरी चाचा को समझा दीजिए। यह कह रहे हैं कि तख्त और कुर्सियां उठा ले जाओ। चबूतरे का रंग-रोगन भी मत कराओ। चाचा इसे चुनावी रिश्वत समझ रहे हैं। जबकि मैं तो सामाजिक कार्य कर रहा हूँ। यहाँ गांव के पंच परमेश्वर बैठते हैं। इसलिए प्रपंच चबूतरा सुंदर और सुविधा सम्पन्न होना चाहिए।

किंकर महाराज धारा प्रवाह बोल रहे थे। तभी पुरबय टोला से ककुवा व बड़के दद्दा की जोड़ी आ गई। ककुवा ने आते ही पंडितजी को आड़े हाथों ले लिया। ककुवा बोले- का हो पंडित। युहु सब काहे करि रहे हो? अबहीं तलक तौ तुम कहूँ द्याखय नई परेव। परधानी क्यार चुनाव लड़यक भा तौ प्रपंच चबूतरा यादि आवा। तुम दुई ठौरे तख्त अउ दस-बारा कुर्सिन ते चतुरी भइय्यक खरीद लेवईया हौ। तुमरे ई काम ते हम सब जनेक बेइज्जती होय जाई। पूरी पँचायत मा काल्हिन ते हल्ला मचि जाई कि प्रपंच चबूतरा वाले सारे परपंचीन का पंडितजी खरीद लिहिन। या बदनामी हम पंच न ल्याब। युहु आपन तिड़क-झामड़ा उठवाये लेव तुरन्त।

बड़के दद्दा ने ककुवा को किसी तरह शांत किया। तब किंकर महाराज सबके सामने गिड़गिड़ाने लगे। महाराज बोले- चतुरी चाचा, अगर आप प्रधानी लड़ेंगे तो मैं आपके समर्थन में बैठ जाऊंगा। आपके चुनाव में लाख-डेढ़ लाख रुपये खर्च करूँगा। इतना ही नहीं, मैं आपके लिए खुलकर पूरी पँचायत में वोट मांगने भी जाऊंगा। लेकिन, आप प्रधानी लड़ने से मना कर चुके हैं। अब आप मुझको प्रधानी लड़ा दीजिए। मैं पूरे पांच साल आपके हुकुम पर काम करूंगा। मैं तो आप लोगों के ही सहारे हूँ। मैं ही पूरी पँचायत में अकेला ब्राह्मण हूँ। आप सब जने मिलकर प्रधानी मुझे दान में दे दीजिए। इसके बाद तो आरक्षण लागू हो जाएगा। फिर क्या जाने कब सीट सामान्य होगी? मेरे पास यही एक मौका है।

चतुरी चाचा

चतुरी चाचा ने कहा- किंकर बेटा, तुम पूरी ताकत से चुनाव लड़ो और जीतो। चबूतरे का रंग-रोगन करवा दो। लेकिन, ये तख्त और कुर्सियां अभी का अभी उठवा ले जाओ। हम सब इस बार किसी के लिए वोट मांगने नहीं जाएंगे। तुम सबसे पहले आये हो। इसलिए हम लोग अंदरखाने से तुम्हारी मदद करेंगे। तब पंडित जी ने तख्त और कुर्सियों को वापस ले जाने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली मंगवाई। किंकर महाराज को विदा करने बाद फिर प्रपंच शुरू हुआ।

कासिम चचा ने बताया- मेरे घर कल शाम पचघरा के प्रताप सिंह आये थे। उन्होंने चकहार स्थित बड़े मियां की मज़ार पर पक्की छत ढलवाने की बात कही है। वह इसके बदले में चाह रहे हैं कि सभी मुसलमान उनका खुला समर्थन करें। मैंने उन्हें किसी तरह समझा-बुझाकर वापस कर दिया। अब सोचने वाली बात यह है कि सभी उम्मीदवार मतदाताओं को धनबल से अपने पक्ष में करना चाह रहे हैं। ये लोग चुनाव में इतनी बड़ी रकम खर्च करेंगे। इसका सीधा अर्थ है कि ये जीतने के बाद पांच साल जनता को लूटेंगे। भ्र्ष्टाचार की नींव तो चुनाव से ही पड़ जाती है। ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव कोई साधरण व्यक्ति लड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। क्षेत्र पँचायत व जिला पँचायत अध्यक्ष वही बन सकता है, जिसके पास करोड़ों रुपये हों, बाहुबल हो और सत्तापक्ष का भी वरदहस्त हो।

इसी बीच चंदू बिटिया लखीमपुर का सूखे मेवा वाला गुड़, ताजा पानी व अदरक-तुलसी वाली कड़क चाय लेकर आ गई। सभी लोगों ने गुड़ ख़ाकर पानी पीया। फिर चाय के कुल्हड़ उठा लिये। ककुवा चाय सुड़कते हुए बोले- का हो चतुरी भाई? तुमार राजनीति हमरे पल्ले नाय परी। हम लोगन ते बिना बात किहे तुम किंकर महाराज का समर्थन दै देहो। चतुरी चाचा बोले- अबसिला हम पंच कौनेव प्रत्याशी क्यार खुलि कय समर्थन न करब। जौनु मदद मांगी, उहिका हां करब। आखिर मा जौनु उम्मीदवार सबसे कम खराब होई, उहिका जितवाय दीन जाई।

मुन्शीजी ने बतकही को आगे बढ़ाते हुए कहा- इस बार अपने वहां ब्लॉक प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। इससे थोड़ी राहत रहेगी। सीट सामान्य होने पर यहाँ बड़ा घमासान होता। वैसे तमाम ब्लाकों में अनुसूचित अथवा पिछड़ी सीट होने पर भी बीडीसी की खरीद ऊँचे दामों पर होगी। साथ ही, सदस्यों को उठाने, छिपाने, खोजने, छीनने में महाभारत जरूर होगी। यही दशा जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में भी होगी। हम सबने कासिम चचा व मुंशीजी की चिंता को जायज ठहराया।

चतुरी चाचा

अंत में चतुरी चाचा ने सबको महाशिवरात्रि की बधाई देते हुए मुझसे कोरोना अपटेड देने को कहा। हमने सबको बताया- विश्व में अबतक 11 करोड़ 56 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से करीब 25 लाख 70 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अबतक एक करोड़ 11 लाख 74 हजार लोग कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं। यहाँ भी एक लाख 57 हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना निगल चुका है।

भारत में महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश व तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों में कोरोना का संक्रमण नाम मात्र है। दूसरी तरफ 60 साल से ऊपर के समस्त नागरिकों को सरकार मुफ्त में कोरोना का टीका लगा रही है। इस अभियान में 45 साल से ऊपर के उन व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है, जो किसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं। बाकी स्कूल/कॉलेज, यातायात, व्यापार सबकुछ पटरी पर आ गया है। इसके बावजूद जबतक सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं हो जाता, तबतक कोरोना से बचाव करना ही होगा। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर हमेशा की तरह हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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