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नायडू ने कहा, ‘किताब के जरिए वीर सावरकर की जो कहानी सामने आती है, उससे हिंदुस्तान

उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को बोला कि आरएसएस के विचारक विनय दामोदर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक, कवि, इतिहासकार, राजनेता व दार्शनिक के मिले जुले रूप थे. विक्रम संपत की पुस्तक ‘सावरकर: इकोज़ फ्रॉम ए फॉरगॉटन पास्ट’ के विमोचन के मौके पर नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में आयोजित एक प्रोग्राम में उप राष्ट्रपति संबोधित कर रहे थे.

नायडू ने कहा, ‘किताब के जरिए वीर सावरकर की जो कहानी सामने आती है, उससे हिंदुस्तान मां के इस दृढ़-संकल्प से भरे बेटे के देशभक्ति से भरे नजरिए का खुलासा होता है. उन्होंने 1857 के विद्रोह को देश की आजादी की पहली लड़ाई करार दिया व सशस्त्र प्रतिरोध को आजादी हासिल करने के विकल्प के तौर पर चुना…सावरकर ने लंदन व सारे यूरोप में कई वीर युवाओं को नेतृत्व प्रदान किया ताकि हिंदुस्तान की आजादी के लिए समर्थन पाया जा सके.’

नायडू ने आगे कहा, ‘वीर सावरकर एक सामान्य पुरुष नहीं थे. वह एक दूरदर्शी समाज सुधारक, भविष्य की ओर देखने वाले उदारवादी व कई मायनों में मूर्तिपूजा के विरोधी व एक प्रख्यात और व्यवहारिक रणनीतिकार थे जो हिंदुस्तान को औपनिवेशिक शासन से आजाद कराना चाहते थे, भले ही हिंसक सशस्त्र प्रतिरोध की आवश्यकता पड़े.’

वहीं, नायडू ने इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर दी आर्ट्स (आईजीएनसीए) में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय प्रोग्राम का उद्घाटन करते हुए बोला कि दुनियाभर के लोगों ने यह माना है कि भारतीय परिवार व्यवस्था समाज में सौहार्द व आंतरिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने की राह दिखाती है. उन्होंने बोला कि समय की कसौटी पर खरी अपनी मजबूत परिवार व्यवस्था के कारण हिंदुस्तान पूरी संसार के लिए आदर्श होने कि सम्भावना है.
यहां उन्होंने समाज में माताओं की किरदार को सराहते हुए बोला कि सभी धर्मों में श्रद्धा व आदर के साथ माताओं का उच्च जगह प्रदान किया गया है. सम्मेलन में नायडू ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम – परिवार व्यवस्था व माता की भूमिका’ पर कहा, ‘‘दुनियाभर के धर्मों में स्त्रियों व माताओं का विशेष महत्व दिया गया है व वे परिवार एवं इन्सानियत की केन्द्र बिंदु हैं.’’

हिंदू धर्म से लेकर, ईसाई धर्म व इस्लाम में माताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने बोला कि हमारे समाज में स्त्रियों को न सिर्फ बराबरी का दर्जा मिला है बल्कि वे पुरुषों से भी श्रेष्ठ हैं क्योंकि वे इन्सानियत की जननी हैं.

 

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