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साहित्य/वीडियो

पिंजरा

पापा मिट्ठू के लिए क्या लाए हैं?” यह पूछने के साथ ही ताजे लाए अमरूद में से एक अमरुद ले कर अंजना मिट्ठू के पिंजरे के पास पहुंच गई। जब से मिट्ठू आया है था अंजना कितनी खुश रहती थी। नहीं तो अंकिता के डिवोर्स लेने के बाद से वह ...

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मुलाकात…

कालेज में पढ़ने वाली ॠजुता अभी तीन महीने पहले ही फेसबुक से मयंक के परिचय में आई थी। दोनों घंटों चैट करते थे। शुरू-शुरू में दोनों में औपचारिक बातें ही होती थीं। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रणय की बातें होने लगी थीं। दोनों एकदूसरे का फोटो भी लेनेदेने लगे थे। ...

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पढ़ाई…

मार्कशीट और सर्टिफिकेट को फैलाए उसके ढेर के बीच बैठी कुमुद पुरानी बातों को याद करते हुए विचारों में खोई थी। सारी पढ़ाई, मेहनत और खर्च उस दिन उसे व्यर्थ लग रहा था। पागलों की तरह पहला नंबर लाने के लिए रातदिन मेहनत करती, पहले नंबर की बधाई के साथ ...

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हम बैल…

हम इस धरती पर बहुत पहले से है,हम सबसे पहले के आवागमन के साधन रहे है। कहते है भगवान शिव को भी हमारी सवारी पसन्द थी ।हम उनके प्रिय में प्रिय रहे है। हमे मन्दिरो में पूजा भी जाता रहा, हम कई युद्ध भी लड़े, जंगल मे मइया गइया की ...

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विजय दिवस

विजय दिवस भारत माता के अमर सपूतों तुम भारत माता की शान हो।  तुम भारत माता की पहचान हो तुमने अगणित इतिहास रचे हैं।  भारत माता की सीमाओं पर आने वाले हर दुश्मन को।  धूल तुमने ही कयीबार चटाई है तिरंगा झंडा के तले एक जुट हो।  दुश्मन को भरपूर ...

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कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब से कोई देखें तो पहचान पाए, मरने का भी वक्त नहीं होता एक गृहिणी के पास” एक आम और मामूली सा शब्द है ‘गृहिणी’ यानि की गृह को संभालने वाली ...

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शिक्षक दीपक शिष्य है बाती, बढ़ते चलना संघ संघाती…

एक शिक्षक के लिए उसके छात्र के हित से बड़ा कुछ नहीं। यह कहावत दीपा मैडम ने सार्थक कर दिखाया। वह एक ऐसे स्कूल को बदलने का बीड़ा उठा कर चली जिसके लिए कई दशकों से किसी ने सुधार का एक कदम भी नहीं बढ़ाया था। लोग कहते-क्या यह विद्यालय ...

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दूसरी औरत में आख़िर क्या ढूँढते हो!

“क्यूँ अपनी चौखट के चाँद में ही दाग नज़र आता है, परायों के दागदार माहताब में भी नूर नज़र आता है” आजकल समाज में जो दिख रहा है, चल रहा है लग्नेत्तर संबंध का ड्रामा उस पर गौर करते एक सवाल उठता है कि, एक शादीशुदा मर्द दूसरी औरत में ...

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साइंस से समाजवाद

साइंस से समाजवाद वर्षो पहले मनोरंजन मतलब राजा महराजा जो वह देखते प्रजा कहाँ देख़ पाती साइंस की तरक्की ने सब को सुलभ क़र दिया फिर सिनेमा हो टीव्ही हो टिकटॉक या रील सब को एक प्लेटफार्म पर लाया है वीआईपी से वीआईपी मिलता था साइंस ने सुलभ कर दिया ...

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आँखे

मैं अपने रिजर्वेशन कोच में बैठा, सामने वाली सीट पर कोई नहीं था। मैंने अपना लगेज व्यवस्थित रखा और मोबाइल चलाने लगा, क्यूंकि अभी गाड़ी चलने में दस मिनिट का समय था, आसपास काफ़ी शौर गुल, हो रहा था। कभी चाय वाले की आवाज़ तो कभी ठंडा गर्म,कुछ आवाजे बच्चों ...

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