राजनीति से ऊपर सोनू सूद की बसें

रिपोर्ट-डॉ.दिलीप अग्निहोत्री

फ़िल्म अभिनेता सोनू सूद का राहत व सेवा कार्य इस समय चर्चा में है। उन्होंने मुम्बई में प्रवासी श्रमिकों को बेहाल देखा होगा। वह मुम्बई छोड़ कर जाना चाहते थे,जाहिर है कि वहां उनके लिए भरण पोषण की पर्याप्त सुविधा नहीं रही होगी। यह अपरोक्ष रूप से महाराष्ट्र सरकार की नाकामी को उजागर करने वाला तथ्य था। सोनू सूद ने कहा कि इन मजदूरों ने वह घर बनवाये है,जिसमें हम रहते है,उन्होंने वह स्टूडियो बनाये है,जहां हम शूटिंग करते है। इसलिए उन्हें सुविधा और सम्मान के साथ उनको मुम्बई से उनके गंतव्य तक भेजा जा रहा है। उन्होंने अपने धन से बसें लगाई,खाने सुविधा दी,श्रमिकों को विदा करने सोनू स्वयं सड़क पर मोर्चा सँभाले रहे।

इस दृश्य से एक सहज सवाल उठता है। मुम्बई को बसों की जरूरत थी,सरकार यह कार्य करने में विफल थी। ऐसे में कांग्रेस महासचिव ने महाराष्ट्र सरकार को अपनी एक हजार बसों की सूची क्यों नहीं सौंपी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तो कांग्रेस की कृपा पर टिके है। प्रियंका गांधी के किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का साहस उद्धव में नहीं है। इसके पहले श्रमिकों को वापसी को लेकर कांग्रेस और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया के साथ वार्ता में इस पर भी विचार व्यक्त किये। उन्होंने तो इसे कांग्रेस का अपराध बताया। कहा कि कोटा से जब हम बच्चे लेकर आए तो राजस्थान की सरकार ने डीजल के पैसे तो लिए ही,ऊपर से बसों का किराया भी मांग लिया।

कांग्रेस महासचिव बस चलाने की अनुमित मांगी थी। वैसे यह प्रस्ताव सामान्य नहीं लग रहा था। क्योंकि उस समय राजस्थान,महाराष्ट्र,दिल्लीऔर पंजाब में बस लगाने की ज्यादा जरूरत थी। वहां से श्रमिक पैदल ही पलायन कर रहे थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिको की सुविधा को वरीयता दी थी। इस कार्य में वह का भी सहयोग लेने को तैयार थे। योगी ने पार्टी लाइन को महत्व नहीं दिया। इसलिये प्रियंका गांधी के कार्यालय से बसों की सूची मांगी गई। फिर जो हुआ वह जगजाहिर है।

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योगी आदित्यनाथ ने मीडिया को बताया कि उनकी बसें कंडम निकलीं। हमने उनके प्रस्ताव को स्वीकार किया था। उनके आंकड़े इतने फर्जी निकले कि यदि प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता तो श्रमिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ होता। कोरोना के खिलाफ लड़ाई के समय में इस तरह का फर्जीवाड़ा अक्षम्य अपराध है। इधर योगी आदित्यनाथ श्रमिकों की सकुशल व सम्मानजनक वापसी के लिए कटिबद्ध थे। करीब सत्ताईस हजार बसें उत्तर प्रदेश सरकार ने लगाई थी। करीब डेढ़ हजार ट्रेनों से भी श्रमिक उत्तर प्रदेश पहुंचे थे। इसके अलावा योगी आपदा राहत के अन्य मोर्चों को भी बखूबी संभाल रहे है। उन्होंने कहा कि जून तक कोरोना टेस्टिंग क्षमता दो गुनी हो जाएगी। उत्तर प्रदेश के कोविदड़ अस्पतालों में एक लाख से ज्यादा बेड उपलब्ध हैं। यह देश में सर्वाधिक है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन दस हजार नमूनों की जांच की क्षमता उपलब्ध है। इसे पन्द्रह जून तक बढ़ाकर पन्द्रह हजार और तीस जून तक बीस हजार कर दिया जाएगा।

कोरोना संक्रमितों की मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की एक लाख से ज्यादा टीमें लगी हुई हैं।प्रदेश में अनलॉक की कार्रवाई शुरू की गई है। कंटेनमेंट जोन को नियंत्रित करते हुए शेष सभी क्षेत्रों में अधिकतम कार्यों को छूट देने की तैयारी हो रही है। आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और पिछले माह की तुलना में इस माह भी अच्छा राजस्व मिल रहा है। सरकार जनता पर कोई अलग से कर लगाने के बजाय उसे अधिक से अधिक राहत देने की कोशिश कर रही हैं। अधिक लोगों के एकत्र होने को हर हाल में रोका जाएगा। कोई बड़े आयोजन नहीं होंगे। फिलहाल इस वायरस के साथ जीना है। इसलिए बचाव के नियमों की आदत डालनी होगी। योगी आदित्यनाथ ने केन्द्र की जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, नमामि गंगे समेत तमाम योजनाओं का उल्लेख किया। कहा कि देश में पहली बार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिला।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण पर हर क्षण पर सहीं निर्णय लिया है। देश में चार चरण में लागू लॉकडाउन के कारण ही हम लोग इस भयंकर महामारी में भी काफी सुरक्षित हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति के पथ पर है। भारत दुनिया में महाशक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इस संकटकाल में कई देश भारत की ओर देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश इस विपरीत समय को अवसर में बदलेगा।

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