बेटी और संसार

बेटी और संसार

बेटी अगर नहीं दुनिया में। बेटे कहां से आयेगे।।
कोख में मत मारो बेटी को। वरना बहुत पछताएंगे।।

बेटी से संसार बना है। हम सब का परिवार बना है।।
बेटी खुशियों का दर्पण है। बेटी से ही प्यार बना है।।

बिना बेटी के अपने घर में। खुशियां कहां से लाएंगे।।
कोख में मत मारो बेटी को। वरना बहुत पछताएंगे।।

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बेटी मां है, बेटी बहन है। बेटी सलहज या साली हैं।।
यह भी किसी की बेटी थी। जो आज तेरी यह घरवाली है।।

नहीं बचेगी बेटी जग में। रिश्ते कहा से लाएंगे।।
इनके किस्से जग में हम। फिर कैसे दोहराएंगे।।

कोख में मत मारो बेटी को। वरना बहुत पछताएंगे।।

हर्ष दुबे, फर्रुखाबाद

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