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दिल्ली : कुत्तों ने दो सगे मासूम भाइयों को नोच खाया, 30 से ज्यादा जख्म

दिल्ली के वसंतकुंज स्थित सिंधी कॉलोनी में बेहद दर्दनाक घटना ने ना सिर्फ लोगों को झकझोर दिया बल्कि चिंता भी बढ़ा दी है। यहां 5-6 कुत्तों ने दो सगे भाइयों को शिकार बना लिया। तीन दिन के अंदर दोनों भाइयों की मौत हो गई।

बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की मानें तो एक बच्चे के शरीर पर कुत्तों के काटने के 30 से ज्यादा निशान थे। कुत्तों ने बच्चे को इस कद्र काटा कि उसके शरीर के कई अंग शरीर से अलग हो गए हैं। कई अंगुलियां शव के साथ अलग से आई थी। कई अंगों की केवल त्वचा ही बची थी। बच्चे के शव के कई अंगों को टांके लगाकर जोड़ा गया।

पहली घटना शुक्रवार को हुई, जिसमें कुत्तों ने सात वर्षीय आनंद को शिकार बनाया था। वहीं, दूसरी घटना रविवार सुबह की है। पांच वर्षीय आदित्य पर पांच कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। कुत्तों ने लोगों के पहुंचने तक बच्चे को नोंचकर मार डाला। बच्चे के शरीर पर 30 से ज्यादा बार काटने के निशान मिले हैं।

शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे वसंत कुंज साऊथ थाना पुलिस को एक बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत मिली थी। पुलिस ने शिकायत पर तुंरत कार्रवाई करते हुए बच्चे की तलाश शुरू की। करीब दो घंटे बाद जंगल में एक दीवार के पास आनंद के शव को पुलिस ने बरामद किया। बच्चे के शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान थे और शरीर के कई अंग बुरी तरह से अलग हो गए थे। रविवार सुबह आनंद का छोटा भाई आदित्या अपने चचेरे भाई चंदन के साथ जंगल में गया था। चंदन आदित्य को छोड़ कर कुछ दूर चला गया, इसी दौरान कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। तभी वहां पुलिस अधिकारी भी आनंद की जांच के लिए पहुंचे थे। उन्होंने आदित्या को अस्पताल पहुंचाया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

प्राथमिक जांच में स्थानीय लोगों ने बताया जंगल में कुत्तों के कई झुंड मौजूद हैं। वह अक्सर जानवरों पर भी हमला करते हैं। शुक्रवार सुबह आनन्द का छोटा भाई आदित्या शौच के लिए अपने चचेरे भाई चंदन के साथ जंगल में गया था। चंदन आदित्या को छोड़कर कुछ दूर चला गया, इसी दौरान कुत्तों का झुंड वहां आ गया। कुत्तों ने बच्चों पर हमला कर दिया। बच्चा चिल्लाने लगा तो चंदन उसे बचाने के लिए दौड़ा। इसी दौरान वहां आनंद की मौत की जांच कर रहे जांच अधिकारी एसआई महेन्द्र भी जांच के लिए पहुंचे थे।

वसंतकुंज में शुक्रवार को आनंद की मौत के बाद से ही परिजन सदमे में थे। परिजन रविवार को आनंद के शव का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसका शव घर आने से पहले ही छोटे भाई आदित्या की मौत की खबर परिजनों तक आ गई। मौसी संतोष ने बताया कि वह शुक्रवार से ही बहन के घर रूकी हुई है, क्योंकि उसकी बहन की तबीयत सही नहीं है। वह खाना तक नहीं खा रही। बार-बार बच्चों को याद कर रोने लगती है और बेहोश हो जाती है। रविवार सुबह जब आदित्या ने शौच जाने की बात कही तो उसके चचेरे भाई चंदन को उसके साथ भेज दिया था। उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुत्ते चंदन के सामने ही आदित्या को अपना शिकार बना लेंगे।

दो बच्चों की मौत से बच्चों की मां बदहवास स्थित में है। पिता मानसिक रूप से बीमार हैं, पिता को पता ही नहीं कि उनके दो बच्चों की मौत हो गई है। मां रोते हुए कह रही थी कि मैं 22 सौ रुपये बचाने के लिए सिंधी बस्ती में रहने के लिए आई थी। यहां अपने दो बेटे खो दिए। इतना बोलते ही मां फिर बेहोश हो जाती है। बच्चों की मौसी संतोष ने बताया कि उसकी बहन ब्यूटी पार्लर में काम करके अपना परिवार चलाती है। वह 10 साल से महिपालपुर इलाके में रहती थी। जहां उसे 22 सौ रुपये किराया देना पड़ता था। उसकी बहन के जेठ का परिवार सिंधी कॉलोनी में रहता है। 8 माह पहले उसकी जेठानी ने उसे सिंधी बस्ती में रहने के लिए कहा। इसके बाद वह यहां रहने आई थी।

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