साथ मिलकर कदम बढ़ा रहे फाइलेरिया पीड़ित

  • फाइलेरिया या हाथी पाँव की जागरूकता पर कैंप आयोजित।
  • सीफ़ार की ओर से फाइलेरिया पीड़ितों के लिए चलाया जा रहा कार्यक्रम।

कानपुर। फाइलेरिया एक ऐसा रोग है जिसमें पीड़ित व्यक्ति की जान तो नहीं जाती पर व्यक्ति दिव्यांगता की श्रेणी में पहुँच जाता है। क्योंकि फाइलेरिया का कोई उपचार नहीं है इसलिए सभी को इसके बचाव के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए, यह कहना है जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह का।

कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी ए.के.सिंह ने बताया कि फाइलेरिया रोग में अक्सर हाथ या पैर में सूजन आ जाती है। यह सूजन इतनी अधिक हो जाती है कि व्यक्ति दिव्यांगता की श्रेणी में आ जाता है। इससे प्रभावित अंग अधिक सूजन के कारण हाथी के पाँव की तरह दिखने लगता है, इसलिए इसे हाथी पांव भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों से फैलता है, इसलिए सचेत रहें। फाइलेरिया का उपचार मुफ्त है।

फाइलेरिया को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और अनेक स्वयंसेवी संस्थाएं प्रयास कर रही हैं । इसी क्रम में स्वयंसेवी संस्था सीफ़ार की ओर से फाइलेरिया से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को सीफ़ार की ओर से कल्याणपुर ब्लॉक के कटरा भौसार में प्रशिक्षण और जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। आयोजित कैंप में सीफार के सहयोग से गठित स्वयं सहायता समूह “गौरीशंकर समिति” के सदस्यों को फाइलेरिया ग्रसित अंग की देखभाल और रख-रखाव पर प्रशिक्षण दिया गया।

सीफार की ओर से डॉ. एस.के. पाण्डेय ने फाइलेरिया ग्रसित व्यक्ति के पैर को धुला और फाइलेरिया ग्रसित अंग की साफ-सफाई व रख-रखाव की पूरी प्रक्रिया दिखाई। डॉ. पाण्डेय ने सभी को ऐसे व्यायाम भी बताएं जिससे फाइलेरिया की सूजन में आराम मिलता है। उन्होंने एम.डी.ए. के दौरान लोगो से फाइलेरिया की दवा खाने की सलाह भी दी।

फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति को अक्सर अपनी बीमारी के चलते समाज और कभी-कभी परिवार में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है । ऐसे में पीड़ित व्यक्ति स्वयं को समाज में अलग-थलग महसूस करता है और अपनी परेशानियों को किसी से साझा भी नहीं कर पता। ऐसे में स्वयंसेवी संस्था सीफ़ार की ओर से फाइलेरिया पीड़ितों को एक मंच देने की कोशिश की जा रही है। फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्तियों का स्वयं का सहायता समूह तैयार किया जा रहा है जो अपनी समस्याओं को एक दूसरे से साझा कर बेहतर उपचार भी पा सकेंगे और और समाज में फैलेरिया के प्रति फैली भ्रांतियों और भेद-भाव को भी दूर करेंगे।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सचेंडी से डॉ. विपिन राज ने बताया कि फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसका असर शरीर पर बहुत देर से दिखता है। किसी व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण दिखने में संक्रमित होने के बाद पांच से दस साल भी लग सकते हैं। कार्यक्रम में सीफ़ार की ओर से जिला समन्वयक प्रसून द्विवेदी व राम राजीव सिंह तथा समिति सदस्य मौजूद रहें

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर

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