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क्लाइमेट एजेंडा की वायु गुणवत्ता निगरानी में निकला दशाश्वमेध घाट की हवा में सबसे ज्यादा प्रदूषण 

  • क्लाइमेट एजेंडा ने चार प्रतिष्ठित घाटों पर की वायु गुणवत्ता निगरानी, दशाश्वमेध घाट पर हवा में सबसे ज्यादा प्रदूषण 

  • अस्सी घाट पर प्रदूषण का स्तर बेहद खराब, केदार और पञ्चगंगा तुलनात्मक तौर पर साफ़ 

  • स्थानीय नागरिकों और सैलानियों के स्वास्थ्य से बंद हो खिलवाड़, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का हो क्रियान्वयन 

  • दशाश्वमेध और अस्सी पर वायु गुणवत्ता स्तर बेहद खराब, केदार और पंचगंगा क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर. 

  • Published by- @MrAnshulGaurav
  • Tuesday, April 19, 2022

वाराणसी: क्लाइमेट एजेंडा की ओर से शहर के 4 अति महत्वपूर्ण घाटों पर वायु गुणवत्ता निगरानी का काम किया गया. 18 अप्रैल 2022 को, शाम 5 बजे से 7 बजे तक गयी इस निगरानी में कम मूल्य की छोटी, लेकिन अति भरोसेमंद मशीनों का उपयोग किया गया। अस्सी, केदार, दशाश्वमेध और पंचगंगा घाट पर इस निगरानी का उद्देश्य, आम नागरिक और जिला प्रशासन को गहरी और बेपरवाह मुद्रा से जगाने का था.

क्लाइमेट एजेंडा की वायु गुणवत्ता निगरानी में दशाश्वमेध घाट की हवा में सबसे ज्यादा प्रदूषण 

इस गतिविधि के बारे में जानकारी देते हुए क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने कहा: “राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वाराणसी इकाई को शहर में वायु प्रदूषण के वर्ष पर्यन्त बढे हुए स्तर की चिंता केवल तब होती है, जब देश में दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में वायु प्रदूषण पर चर्चा होती है. अगर यह विभाग वर्ष पर्यन्त सक्रिय रहता तो वाराणसी में गर्मियों के दौरान, प्रदूषण की मार इतनी भयावह नहीं होती कि हमारे द्वारा अस्सी घाट पर स्थापित किया गया कृत्रिम फेफड़ा मात्र तीन दिनों में काला पड़ जाए.” 

एकता कहती हैं कि: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत बनारस जिले को प्राप्त करोड़ों रूपए की रकम का उपयोग शहर के प्रदूषण को कम करने में किया जाना चाहिए था, ताकि वाराणसी में बच्चे, वरिष्ठ नागरिक एवं मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण का असर कम हो सके.”

इस निगरानी का उद्देश्य, आम नागरिक और जिला प्रशासन को गहरी और बेपरवाह मुद्रा से जगाने का था. 

एकता ने बताया: “सोमवार को शहर के चार प्रतिष्ठित घाटों पर वायु गुणवत्ता की निगरानी से प्राप्त आंकड़े शहर के निजामों की आँखें खोलने की क्षमता रखते हैं. गर्मी के मौसम में, जब की प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक तौर पर कम रहता है, फिर भी उपरोक्त सभी घाटों पर हालात चिंताजनक मिले.

निगरानी के बाद मिले नतीजों के बारे में एकता ने बताया कि:  इन आंकड़ों को जारी करने का हमारा आशय केवल आलोचना करना नहीं है. जिलाधिकारी द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के सही तरीके से अनुपालन के लिए बनी जिला कमिटी में शामिल संस्थाओं और संगठनों को भी कुछ पहल करनी चाहिए, केवल बंद कमरों में बैठ कर अधिकारियों संग बैठकें करने से शहर का प्रदूषण काम नहीं हो सकता.”  

ज्ञात हो कि क्लाइमेट अजेंडा द्वारा अस्सी घाट पर स्थापित कृत्रिम फेफड़े केवल 72 घंटों में वायु प्रदूषण के कारण काले पड़ गए थे.

रिपोर्ट- जमील अख्तर 

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