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भारत में कब से शुरू हो रहा है रमजान, जानें- रोजे रखने का क्या है महत्व?

कोरोना के कोहराम और लॉकडाउन के बीच रमजान का पाक महीना शुरू होने जा रहा है। इस्लाम में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस साल अगर 23 अप्रैल को चांद दिखाई देता है तो 24 अप्रैल को पहला रोजा रखा जाएगा। वहीं, अगर चांद 24 अप्रैल को दिखाई देता है तो पहला रोजा 25 अप्रैल को रखा जाएगा। इस्लाम में रमजान के महीने को सबसे पाक यानी पवित्र महीना माना जाता है। ये इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना होता है।

मुसलमान रमजान के पूरे महीने यानी चांद की तारीख के अनुसार 29 या 30 दिन के रोजे रखते हैं। रमजान का चांद दिखाई देने के बाद सुबह को सूरज निकलने से पहले सहरी खाकर रोजा रखा जाता है। जबकि सूर्य ढलने के बाद इफ्तार होता है। जो लोग रोजा रखते हैं वो सहरी और इफ्तार के बीच कुछ भी नहीं खाते पीते हैं।

इसके लिए सहरी का समय 3 बजकर 55 मिनट पर होगा। जबकि इफ्तार का समय 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। इसी क्रम में रमजान के आखिरी रोजा के दिन सहरी का समय 3 बजकर 29 मिनट पर होगा। जबकी, इफ्तार 6 बजकर 48 मिनट पर होगा। इस महीने में हर दूसरे और तीसरे रोजे के दिन सहरी और इफ्तार के समय में बदलाव होता रहता है। इस साल सबसे बड़ा रोजा महीने के आखिरी दिन होगा, जो 15 घंटे 27 मिनट का होगा।

रमजान के महीने में अल्लाह की किताब ‘कुरान शरीफ’ नाजिल यानी जमीन पर उतरी थी। इसलिए रमजान के महीने में मुसलमान ज्यादातर अपना वक्त नमाज और कुरान पढ़ने में गुजारते हैं। रमजान में मस्जिदों में तरावीह यानी एक विशेष नमाज भी पढ़ी जाती है। हालांकि, इस बार कोरोना वायरस के चलते मस्जिदों में लोग एक साथ नमाज नहीं पढ़ सकेंगे।

इस्लाम धर्म की मान्यता है कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद हो जाते हैं। अल्लाह रोजेदार और इबादत करने वाले की दुआ कूबुल करता है। रमजान के पवित्र महीने में गुनाहों से बख्शीश मिलती है। कहा जाता है कि रमजान का महीना इंसान को खुद पर काबू करना सिखाता है। रमजान में मुसलमान इबादत करके अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। मान्यता है कि इस महीने में की गई इबादत का बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना अधिक सवाब यानी फल मिलता है।

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