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साहित्य/वीडियो

सावन का महीना

सोनल ओमर

सावन का महीना बंजर धरती पर जब हरियाली लहराये। उदास सूना-सूना दिल भी खिल-खिल जाये। उमड़-उमड़ के बादल गरजने लग जाये। जब सावन का महीना झूम-झूम कर आये।। कलियाँ फूल बने उनपर भँवरे मंडरायें। रिमझिम बरखा में मोर नाचे, पपीहा गायें। प्रकृति को देखकर हर्षित मन मुस्काये। जब सावन का ...

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वाह रे ठाकुर जी

आशीष तिवारी निर्मल

वाह रे ठाकुर जी तुम ने गज़ब रचा संसार, चहुंओर मचा है हाहाकार, वाह रे ठाकुर जी………..! बेबसी का लगा हुआ अंबार, खोया अपनापन और प्यार, वाह रे ठाकुर जी…………! छद्मश्री को पद्मश्री उपहार, सच्ची कला हो रही भंगार, वाह रे ठाकुर जी…………! खूब बढ़ा काला कारोबार, मौन देख रही ...

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प्रतिबन्धित ऐप पर अभिनेत्री रिमिसेन और पाक क्रिकेटर का वीडियो सामने आया

लखनऊ। हिन्दू एकता आन्दोलन पार्टी ने फिल्म अभिनेत्री एवं भाजपा नेत्री रिमिसेन और पाकिस्तान के क्रिकेटर कामरान अकमल के साथ भारत में प्रतिबन्धित बीगोलाईव पर सार्वजनिक तौर पर देखे जाने पर सवाल उठाते हुये केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले की एनआईए से जांच करवाये जाने की मांग की ...

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बिन फेरे हम तेरे

कहने में और सुनने में कुछ अजीब लगता है, लेकिन ये भी एक सच्चा रिश्ता है ,दिल का रिश्ता है। जब दिल से दिल जुड़ जाता है ,तो चाहे हम साथ-साथ ना रहे, लेकिन हमे एक दूसरे की फिक्र होती है, एक दूसरे के प्रति लगाव होता है, इसी को ...

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शब्द

ज्योति उपाध्याय

शब्द शब्दों का कोई नाम नहीं ये किसी के गुलाम नहीं जब चाहे आ जायें मुख पे इन पे कोई लगाम नहीं इनकी रचना किसने की लगे उसे कोई काम नहीं कोई ना रोके टोके इनको तभी फिरे सरेआम यूँ ही टकराकर बस गिर ही जायें लगते नहीं ये जाम ...

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पेड़ की आँखों से भी निकलता है आंसू

कुमार संदीप, मुजफ्फरपुर(बिहार)

हम सभी जानते हैं, पेड़-पौधे हमारा साथ सदा निभाते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक का साथ होता है हमारा पेड़-पौधों के साथ। हमारी अधिकांश ज़रूरतों को पूरा करते हैं पेड़-पौधे। हमारी सांसें भी पेड़-पौधों की वजह से ही चल रही हैं। पेड़-पौधों के बिना हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं ...

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अजन्मी अंतिमा की पीड़

भावना ठाकर 'भावु', बेंगुलूरु

मत उम्मीद रखो मुझसे की मेरी ज़िंदगी का अनुवाद तुम्हारी भावनाओं से जुड़ा हो “मैं जन्मी हूँ एक छोटी सी अदम्य आक्रोशित कहानी के लिए” और तुम मुझे कभी नहीं समझ सकते। तुम्हें मुझे पढ़ने के लिए उस क्षितिज तक जाना होगा जहाँ से मेरी लिखी हर संज्ञा को महसूस ...

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सावन कजरी की तान और मुस्काता किसान

मीनाक्षी सुकुमारन, नोएडा

सावन कजरी की तान और मुस्काता किसान ———————————————– छम छम रिमझिम रिमझिम सावन आया लेकर मधुर तान हर लब पर कहीं पड़ने लगे झूले कहीं गूंजने लगे मंगल गीत कहीं महक मेहंदी की कहीं खनक कंगन की छम छम रिमझिम रिमझिम सावन आया लेकर मधुर तान हर लब पर सावन ...

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दुम दबा के ड्रैगन भागा

आशुतोष, पटना (बिहार)

दुम दबा के ड्रैगन भागा जिनको हमने दोस्त बनाया। वही पीठ पर भोके खंजर।। जिनको हमने अपना माना। उनके हाथ खून से लता पथ।। देखो चीन पुनः सीमा पर। युद्ध करने के लिए आया है।। भारत ने भी ठान लिया है। अक्साई भारत बनाना है।। तम्बू गाड़े या बनाये बंकर। ...

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मां

प्रेम बजाज, जगाधरी (यमुनानगर)

मां क्या तुलना उस मां की सुरज- चांद – सितारों से गंगा से ,जमुना से , समुद्र से या नदियां हज़ारों से । मां की ममता का कोई मोल नहीं , दुनियां में इसके बराबर दुनियां में कोई मीठा बोल नहीं । सुख का सागर है मां , प्यार की ...

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